जानलेवा है वर्चुअल दुनिया की रीयल समस्या
मधेपुरा : तकनीकी क्रांति ने इंटरनेट के जरिये असल समाज से अलग एक वर्चुअल समाज को तेजी से गढ़ा है़ सोशल साइट के रूप में फेसबुक और व्हाट्स एप्प पूरी दुनिया में बेहद लोकप्रिय है़ इन सोशल साइट पर सबकी वर्चुअल चौपाल लगती है़ खास तौर पर फेसबुक युवाओं पर पूरी तरह हावी हो चुका […]
मधेपुरा : तकनीकी क्रांति ने इंटरनेट के जरिये असल समाज से अलग एक वर्चुअल समाज को तेजी से गढ़ा है़ सोशल साइट के रूप में फेसबुक और व्हाट्स एप्प पूरी दुनिया में बेहद लोकप्रिय है़ इन सोशल साइट पर सबकी वर्चुअल चौपाल लगती है़ खास तौर पर फेसबुक युवाओं पर पूरी तरह हावी हो चुका है़
लेकिन इन साइट के गलत उपयोग का खामियाजा भी लड़कियों को उठाना पड़ रहा है़ उनके नाम से फेसबुक पर अकाउंट बना कर अश्लीलता फैलाई जाती है़ 99 फीसदी से अधिक मामलों में उन लड़कियों को इसका पता तक नहीं होता़ अगर मालूम हो भी जाता है तो ये लडकियां किसी से बताने से भी डरती हैं कि आरोप उन पर ही आ जायेगा़
ऐसे में वे निरंतर भय के माहौल में जीने लगती हैं. इसका दुष्परिणाम काफी खतरनाक भी हो सकता है़ अभिभावक सामाजिक प्रतिष्ठा के हनन से डरते हैं. प्रभात खबर ने वर्चुअल दुनिया की वास्तविक परेशानी जैसे संवेदनशील मसले पर सार्थक बातचीत की पहल शुरू की है ताकि युवा तथा किशोर मन को कुम्हलाने से बचाया जा सके़
फेसबुक पर काफी सक्रिय हैं मधेपुरा की गतिविधि . मधेपुरा में ही बहुत सारे स्कूल, कलेज भी फेसबुक पर सक्रिय हैं. इनसे बच्चों को फायदा मिलता है़ इससे स्कूल के बारे में सूचनाएं, कार्यक्रम आदि के बारे में तुरंत जानकारी मिल जाती है़ पढ़ाई के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जा रहा है़ एसपी कुमार आषीष के कारण मधेपुरा पुलिस भी फेसबुक पर काफी सक्रिय है़ जिले भर में पुलिस की गतिविधि फेसबुक पर लगातार पोस्ट की जाती है़ इससे पुलिस की पहुंच सीधे जनता तक होती है़
मधेपुरा के लगभग सभी बड़े नेता भी फेसबुक से जुड़ चुके हैं. वे अपने कार्यों को साइट पर पोस्ट कर सीधे जनता से संवाद करते हैं.
सोशल साइट के हैं अनगिनत फायदे . सोशल साइट के कई फायदे हैं. इसके जरिये किसी जानकारी को तुरंत खोज सकते हैं और मित्रों के साथ साझा कर सकते हैं. कॉलेज स्कूल के पेज से जुड़ कर तुरंत का अपडेट प्राप्त कर सकते हैं. चैटिंग कर किसी मित्र या शिक्षक से तुरंत बात कर सकते हैं. वीडियो कालिंग के जरिये दूर बैठे किसी परिजन से देख कर बात कर सकते हैं.
अपना कोई फोटो प्राइवेट या पब्लिक पोस्ट कर सकते हैं. अपने व्यापार को प्रमोट कर सकते हैं. लेकिन, पहुंच होने के कारण सभी न्यूज चेनल के ताजा अपडेट प्राप्त कर सकते हैं. किसी युनिवर्सिटी के पेज से जुड़ कर वहां के छात्रों से किसी कॉलेज की जानकारी हासिल कर सकते हैं. अपने कार्य को जन जन तक पहुंचा सकते हैं. मोबाइल एप्प के जरिये अनलाइन क्लास का हिस्सा बन सकते हैं. ग्रुप के माध्यम से प्रश्नों और नोट्स का आदान प्रदान कर सकते हैं. परिवार के सभी सदस्यों को जोड़ कर एक संयुक्त परिवार जैसा इसका उपयोग किया जा सकता है़
लेकिन है उतनी ही खतरनाक भी . सोशल साइट निश्चय ही बहुउपयोगी है लेकिन अगर यह लत बन जाये तो समाज को नुकसान भी पहुंचाता है़ फेसबुक में अकाउंट बनाने की न्यूनतम उम्र 16 साल है मगर टीन यूजर गलत जानकारी देकर अपना अकाउंट तैयार कर लेते हैं. चूंकि अब स्मार्ट फोन के जरिये इंटरनेट ने हर घर में अपनी जगह बना ली है इसलिए उस कम उम्र यूजर को इसे इस्तेमाल करने के लिए घर के बाहर नहीं जाना पड़ता है़ वे बिना रोक-टोक के किसी से भी मित्रता करते हैं.
अपना फोटो, संदेश या अन्य गोपनीय बातें भी नि:संकोच शेयर करते हैं उम्र कम होने के कारण वे भविष्य के समस्याओं से अनजान होते हैं.
अपनी बेटियों को समझें . मधेपुरा में ऐसी अनगिनत रूपा और विमला हैं, जो हर दिन इस तरह की परेशानी का सामना कर रही है़ लेकिन हर लडकी रूपा की तरह अपने भाई से परेशानी नहीं बांट सकती हैं और न हर भाई शक्ति की तरह अपनी बहन की परेशानी समझ कर इसका समुचित निदान करने की कोशिष करता है़
कहते हैं समाजशास्त्री. समाजशास्त्री आलोक कुमार कहते हैं कि घर में फेसबुक पर प्रतिबंध लगा देना या मोबाइल फोन छीन लेना इसका समाधान कतई नहीं है़ इससे किशोर मन में विद्रोह या हीनता की भावना पनपेगी़ होना यह चाहिए किघर के बड़े अपने बच्चे के साथ बैठ कर उनके साथ भविष्य में होने वाले समस्याओं की चर्चा करें. सही दोस्ती और गलत दोस्ती के अंतर को समझायें. दोस्ती के आड़ में उठाये जाने वाले गलत फायदे के बारे में भी खुल कर चर्चा करें.
हमारे बच्चे आधुनिकता को अपनाने के लिए लालायित हैं लेकिन अभिवावक तकनीक के जानकार नहीं हैं. इससे गंभीर समस्या बन जाती है़ अच्छे लोग कैसे बात करते हैं. उनके स्पर्श के बारे में भी बतायें. मांओं पर यह जिम्मेदारी ज्यादा है़ अपने बच्चे के साथ हमेशा प्यार से पेश आयें ताकि वे इस प्यार को घर से बाहर न ढूंढें. तकनीकी बदलाव को कोई रोक नहीं सकता़ इसे अपना कर ही समाधान ढूंढा जा सकता है़