कुमारखंड : समाजवाद के पैरोकार भूपेंद्र बाबू अपने कर्मों व समाज के प्रति समर्पण के कारण सदैव जीवित रहेंगे. उनकी शिक्षा थी कि कर्म प्रधान बनें, सच्चाई से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें. भूपेंद्र नारायण मंडल के पैतृक गांव रानीपट्टी पंचायत में जयंती समारोह का आयोजन किया गया.
समारोह के दौरान आपदा प्रबंधन मंत्री प्रो चंद्रशेखर व पूर्व मंत्री नरेंद्र नारायण यादव द्वारा संयुक्त रूप से भूपेंद्र नारायण मंडल के चित्र पर माल्यार्पण किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो श्यामल किशोर यादव ने की जबकि मंच संचालन डॉ आलोक कुमार ने किया. भूपेंद्र बाबू की जीवनी वाचन कृष्णानंद झा द्वारा किया गया. इस मौके पर मंत्री ने कहा कि भूपेंद्र बाबू महान चिंतक, दूरदृष्टा व्यक्ति थे. उनके जीवन से हम सबों को सीख लेने की जरूरत है. उनके बारे में कुछ भी कहना कम ही है.
वहीं नरेंद्र नारायण यादव ने कहा कि भूपेंद्र बाबू के बताए मार्ग पर चलकर ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दी जा सकती है. भूपेंद्र बाबू एक महान व्यक्तित्व थे. जदयू विधायक रमेश ऋषिदेव ने कहा कि भूपेंद्र बाबू संत विचार के व्यक्ति थे और उनके बताए मार्ग पर चल कर ही हम अपना लक्ष्य हासिल कर सकते हैं. उन्होंने समाज में लोगों के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए.
उनके विचारों पर चलकर समाज को नई दिशा मिलेगी. इस मौके पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया. रेखा यादव और रोशन कुमार द्वारा स्वागत गान और भजन की प्रस्तुति दी गई. मौके पर कृष्णानंद झा ने भूपेंद्र बाबू की जीवनी पर व्याख्यान दिया. उन्होंने कहा कि भूपेंद्र बाबू एक महान व्यक्तित्व थे. उन्होंने समाज में दबे कुचले वर्ग को उठाने में अहम भूमिका निभाई. छुआछूत मिटाओ आंदोलन में भी इनकी अहम भूमिका रही. स्वाधीनता संग्राम में भी भूपेंद्र बाबू का योगदान सराहनीय रहा. उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी भूपेंद्र बाबू का योगदान रहा जिस कारण कोसी क्षेत्र में शिक्षा में प्रगति हुई.
उन्होंने समाजवादी दर्शन को सत्ता की मंजिल तक पहुंचाने में आधारभूमि का निर्माण किया. जिस आधार पर आज पिछड़ों दलितों व वंचितों को अपना हक प्राप्त हुआ है. साथ ही सत्ता में भागीदारी सुनिश्चित हुई है. भूपेंद्र बाबू का संपूर्ण जीवन समाज के उत्थान में लगा रहा. इस मौके पर पूर्व विधायक राधाकांत यादव, बिहार विधान परिषद सदस्य डॉ एनके यादव, दिनेश प्रसाद यादव, पूर्व प्रतिकुलपति डॉ कौशल किशोर मंडल, पूर्व प्राचार्य प्रो सच्चिदानंद, परमेश्वरी यादव, प्रो सचिंद्र, प्रो रणधीर कुमार ने भी अपने अपने विचार प्रकट किए. अध्यक्षीय संबोधन प्रो श्यामल किशोर यादव जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ नीरज कुमार ने किया.
