बनमनखी चीनी मिल . उदाकिशुनगंज क्षेत्र के किसानों ने गन्ना उत्पादन से मुंह मोड़ा

बंद चीनी मिल ने कम की जिंदगी की मिठास जनप्रतिनिधियों ने कई बार चीनी मिल खोलने की बात की, नतीजा रहा सिफर उदाकिशुनगंज : सरकारी की बेरुखी के कारण उदाकिशुनगंज अनुमंडल क्षेत्र में गन्ने की मिठास नगण्य हो चुकी है. किसान गन्ने की खेती की ओर से विमुख होते जा रहे हैं. कृषि अनुसंधानों के […]

बंद चीनी मिल ने कम की जिंदगी की मिठास

जनप्रतिनिधियों ने कई बार चीनी मिल खोलने की बात की, नतीजा रहा सिफर
उदाकिशुनगंज : सरकारी की बेरुखी के कारण उदाकिशुनगंज अनुमंडल क्षेत्र में गन्ने की मिठास नगण्य हो चुकी है. किसान गन्ने की खेती की ओर से विमुख होते जा रहे हैं.
कृषि अनुसंधानों के मुताबिक यह क्षेत्र गन्ने की खेती के लिए उपजाउ है. पूर्णिया जिले के बनमनखी में जब चीनी मिल सक्रिय थी तब बिहारीगंज स्टेशन पर जिले के उदाकिशुनगंज अनुमंडल क्षेत्र से पर्याप्त मात्रा में मिल को गन्ने की आपूर्ति की जाती थी. लेकिन चीनी मिल के बंद हो जाने के बाद इस क्षेत्र के गन्ना किसानों ने भुखमरी के कारण गन्ने की खेती काफी कम कर दी. अब जो खेती हो रही है उससे गुड़ बनाने में इस्तेमाल किया जाता है.
पूर्व उद्योग रेणु कुशवाहा ने इस क्षेत्र में चीनी मिल की स्थापना के लिए प्रयास किया. बिहारीगंज -उदाकिशुनगंज पथ पर मधुबन गांव के समीप भूमि का सर्वे कर चीनी मिल स्थापित करने की योजना बनायी गयी तो किसान में खुशी की लहर दौड़ गयी. लेकिन वह योजना भी फाइलों में सिमट कर रह गयी. बताया जाता है कि भूमि अधिग्रहण के काम का कुछ किसानों ने विरोध जता दिया.
हालांकि वहीं लोगों का यह भी कहना है कि मिल के लिए अनुमंडल क्षेत्र में अन्य स्थानों पर भी जमीन उपलब्ध थी. लेकिन इस दिशा में ईमानदारी से प्रयास नहीं किया गया अन्यथा भूमि उपलब्ध होना कोई बड़ी बात नहीं थी. किन्ही खास लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए ही मिल की योजना बनायी गयी थी.
कहते हैं किसान . बीच – बीच में किसानों को कई बार प्रशिक्षण भी दिया गया लेकिन चीनी मिल नहीं होने के कारण यह प्रशिक्षण भी नाकाम साबित होता रहा. क्षेत्र के किसान संजीव यादव, गोपाल कुमार, बासू यादव, शंभु राय आदि ने बताया कि सिर्फ प्रशिक्षण से क्या होगा. एक समय था ईख की खेती से ही परिवार का भरण पोषण हुआ करता था.

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