एमसीआइ की टीम के सामने बेपर्दा हुआ मेडिकल कॉलेज

चंदन, मधेपुरा : जननायक कर्पूरी ठाकुर मेडिकल कॉलेज में एमसीआइ के आठवें निरीक्षण के बाद यह बात साफ हो गयी कि मेडिकल कॉलेज में व्यवस्था शून्य है. निरीक्षण करने आये डॉक्टरों की टीम ने पाया कि मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर व अन्य स्टाफ में से 67 प्रतिशत लोग अनुपस्थित रहते हैं. भवन हस्तांतरित नहीं हुआ […]

चंदन, मधेपुरा : जननायक कर्पूरी ठाकुर मेडिकल कॉलेज में एमसीआइ के आठवें निरीक्षण के बाद यह बात साफ हो गयी कि मेडिकल कॉलेज में व्यवस्था शून्य है. निरीक्षण करने आये डॉक्टरों की टीम ने पाया कि मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर व अन्य स्टाफ में से 67 प्रतिशत लोग अनुपस्थित रहते हैं. भवन हस्तांतरित नहीं हुआ है. रेजिडेंट डॉक्टर नदारद है. निरीक्षण के क्रम में कोई भी रेजिडेंट डॉक्टर उपस्थित नहीं पाये गये.

इसके बाद जब ओपीडी पंजी की जांच हुई तो नियमित तौर पर ओपीडी पंजी में मरीज की इंट्री नहीं पायी गयी, जबकि कागजों पर ओपीडी वहां जारी है. इस बीच बदहाल व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए एक बार फिर पुराने फार्मूले के तहत ओपीडी को सदर अस्पताल में हस्तांतरित करने की कवायद शुरू कर दी गयी. इसके तहत मेडिकल कॉलेज में बहाल सभी 69 डॉक्टर को सदर अस्पताल में रहकर ओपीडी का संचालन करना है.
2008 में भी हुई थी कवायद, 11 साल बाद फिर निकला आदेश: 69 डॉक्टर मेडिकल कॉलेज की ओपीडी सेवा प्रारंभ होने तक सदर अस्पताल में सेवा देंगे. मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य के द्वारा जारी विभागीय आदेश के अनुसार मेडिकल कॉलेज के सभी डॉक्टर अगले आदेश तक सदर अस्पताल में कार्यरत रहेंगे. इस बात की लिखित सूचना चिकित्सकों की सूची के साथ सिविल सर्जन को भी भेजी गयी है.
ज्ञात हो कि 2008 में इस बात को लेकर पहल की गयी थी कि मेडिकल कॉलेज के प्रारंभ होने तक सभी नियुक्त डॉक्टरों व प्रोफेसरों को तत्काल सदर अस्पताल में सेवा देनी होगी, लेकिन फिर कुछ विभागीय कारणवश तत्काल इसे रद्द कर दिया गया था. उसके 11 साल बाद 9 नवंबर 2019 को जब फिर से नींद खुली तो दोबारा इस आदेश को जारी किया गया है. अगर इसी पहल को पहले शुरू कर दी जाती तो आज सदर अस्पताल में डॉक्टर की कमी के कारण आये दिन होने वाले घटनाओं से निजात मिल जाता.
मेडिकल कॉलेज के नाम पर लगातार सैलरी ले रहे डॉक्टरों के लिए यह बड़ा झटका है. सदर अस्पताल में आकर ओपीडी में मरीज को देखने शिवलोक कतरा रहे हैं. यही कारण है कि पत्र में 24 घंटे की मोहलत दी गयी है, लेकिन आज चार दिन बीत जाने के बाद भी कोई डॉक्टर सदर अस्पताल में अपनी सेवा देने नहीं पहुंचे हैं .
नौ नवंबर को जारी आदेश के अनुसार आदेश मिलने के 24 घंटे के बाद सभी डॉक्टरों को सदर अस्पताल मैं सेवा देना आरंभ कर देना था बावजूद इसके चार दिन बीत जाने के बाद भी एक भी डॉक्टर सदर अस्पताल में योगदान नहीं दिये हैं.
प्राप्त पत्र में दिये गये आदेश के अनुसार डॉक्टरों को पत्र प्राप्त होने के 24 घंटे के अंदर ज्वाइन कर लेने की बात कही गयी है. अभी तक एक भी डॉक्टर का योगदान नहीं हुआ है
डॉ सुमन झा, डीएस, सदर अस्पताल, मधेपुरा

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