विश्व स्तनपान सप्ताह के उपलक्ष्य में मंगलवार को लखीसराय जिले के सभी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में विशेष जागरूकता अभियान सह शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में नवजात शिशु के संपूर्ण शारीरिक व मानसिक विकास के लिए स्तनपान के महत्व को रेखांकित करना था.
स्वास्थ्यकर्मियों, गर्भवती और धात्री माताओं ने ली शपथ
अभियान में चिकित्सा पदाधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी (CHO), एएनएम (ANM), आशा कार्यकर्ताओं और आंगनबाड़ी सेविकाओं के साथ-साथ बड़ी संख्या में गर्भवती और धात्री माताओं ने भाग लिया.
कार्यक्रम के दौरान सभी उपस्थित लोगों को सामूहिक रूप से शपथ दिलाई गई:
- जन्म के 1 घंटे के भीतर: शिशु के जन्म के तुरंत बाद (1 घंटे के भीतर) स्तनपान (Initial Breastfeeding) शुरू कराया जाएगा.
- 6 माह तक केवल स्तनपान: शिशु के जन्म से लेकर 6 माह की आयु तक उसे पानी भी नहीं, केवल और केवल मां का दूध ही दिया जाएगा.
- ऊपरी आहार के साथ जारी रहेगा स्तनपान: 6 माह की आयु पूरी होने के बाद पोषक ऊपरी आहार के साथ कम से कम 2 वर्ष या उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखा जाएगा.
अमृत समान है मां का पहला गाढ़ा पीला दूध (कोलोस्ट्रम)
जागरूकता सत्र के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों ने महिलाओं और उनके परिजनों को स्तनपान के वैज्ञानिक फायदों की जानकारी दी:
स्वास्थ्यकर्मियों का संदेश: "मां का पहला गाढ़ा पीला दूध जिसे 'कोलोस्ट्रम' (Colostrum) कहा जाता है, नवजात शिशु के लिए पहला प्राकृतिक टीका (First Vaccine) और अमृत समान है. इसे फेंकने के बजाय शिशु को अवश्य पिलाना चाहिए. यह शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को बढ़ाता है और उसे संक्रमण से सुरक्षित रखता है."
परिजनों से संतुलित आहार व सहयोग की अपील
आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में आयोजित समूह चर्चा और परामर्श सत्र के दौरान परिवारों से भी अपील की गई कि वे धात्री माताओं के खान-पान और मानसिक स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें. माताओं को संतुलित आहार और पारिवारिक सहयोग मिलने पर ही शिशु का समुचित पोषण संभव हो सकेगा.
अभियान के अंत में सभी प्रतिभागियों ने जिले से कुपोषण मिटाने और हर नवजात को स्वस्थ जीवन प्रदान करने के लिए लगातार जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया.
