नगर परिषद में सफाई टेंडर पर घमासान, पुरानी एजेंसी को एक्सटेंशन देने पर उठे सवाल

लखीसराय नगर परिषद में 33 वार्डों की सफाई का टेंडर विवादों में घिर गया है, जहां जारी टेंडर प्रक्रिया को रद्द कर पुरानी एजेंसी को ही दोबारा तीन माह का एक्सटेंशन दे दिया गया है. हर माह 50 लाख रुपये खर्च होने के बावजूद शहर की बदहाल सफाई व्यवस्था को लेकर वार्ड पार्षदों ने नगर परिषद की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं.

लखीसराय से अजीत सिंह की रिपोर्ट: नगर परिषद के 33 वार्डों की साफ-सफाई की व्यवस्था एक बार फिर विवादों के घेरे में है. सशक्त स्थाई समिति की हालिया बैठक में लिए गए एक निर्णय ने टेंडर प्रक्रिया पर सवालिया निशान लगा दिए हैं. समिति ने नई एजेंसी के चयन के बजाय पुरानी एजेंसी को ही तीन माह के लिए कार्य विस्तार (एक्सटेंशन) दे दिया है. हैरान करने वाली बात यह है कि नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी पहले ही टेंडर जारी कर चुके थे, जिसमें दो बिड (निविदाएं) भी प्राप्त हो चुकी थीं.

गाइडलाइन का हवाला देकर टाला गया नया टेंडर

बैठक में दलील दी गई कि वर्तमान टेंडर प्रक्रिया सरकार की गाइडलाइन के अनुरूप नहीं थी, इसलिए इसे टालना जरूरी है. समिति का तर्क है कि टेंडर की प्रक्रिया जिलाधिकारी (डीएम) स्तर से कराई जानी चाहिए. हालांकि, जानकारों का कहना है कि जब टेंडर प्रक्रिया पहले से ही अंतिम चरण में थी और बिड प्राप्त हो चुके थे, तो गाइडलाइन का हवाला देकर पुरानी एजेंसी को दोबारा काम सौंपना संदेह पैदा करता है.

सफाई के नाम पर हर माह 50 लाख का ‘खेल’

विवाद का सबसे बड़ा पहलू यह है कि पुरानी एजेंसी पिछले एक साल से प्रतिदिन के आधार पर काम कर रही है. नगर परिषद द्वारा शहर की सफाई पर हर महीने 50 लाख रुपये से अधिक की मोटी राशि खर्च की जा रही है. इसके बावजूद जमीनी हकीकत कुछ और ही है. कई वार्ड पार्षदों ने खुले तौर पर शिकायत की है कि सफाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है और शहर के कई हिस्सों में कूड़े के अंबार लगे रहते हैं.

डीएम स्तर से गठित होगी कमेटी

नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी प्रभात रंजन ने बताया कि नई टेंडर प्रक्रिया को लेकर जिलाधिकारी को पत्राचार किया गया है. जिलाधिकारी द्वारा एक कमेटी गठित की जाएगी, जिसकी देखरेख में पारदर्शी तरीके से टेंडर की प्रक्रिया पूरी होगी. वहीं, इस मामले में जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार ने स्पष्ट किया है कि नगर परिषद से पत्र प्राप्त होते ही कमेटी गठित कर दी जाएगी ताकि नियमानुसार टेंडर प्रक्रिया को जल्द से जल्द अंतिम रूप दिया जा सके.

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By Divyanshu Prashant

Divyanshu Prashant is a contributor at Prabhat Khabar.

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