बिहार सरकार के 'सबका सम्मान, जीवन आसान' के संकल्प को जमीन पर उतारने के लिए लखीसराय जिला प्रशासन ने एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है. आम नागरिकों की स्थानीय समस्याओं, शिकायतों और भूमि-विकास से जुड़े विवादों के त्वरित निष्पादन के लिए अब जिले की प्रत्येक पंचायत में नियमित 'सहयोग शिविर' का आयोजन किया जाएगा. मुख्य सचिव के निर्देश के आलोक में जिला प्रशासन ने इसका विस्तृत रोस्टर और दिशा-निर्देश जारी कर दिया है. नए आदेश के तहत प्रत्येक माह के पहले और तीसरे मंगलवार को चिह्नित पंचायतों में यह शिविर लगेगा, जिससे ग्रामीणों को दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति मिलेगी.
सीधे गांव में पहुंचेगा प्रशासनिक अमला
सहयोग शिविर के माध्यम से प्रशासनिक तंत्र को सीधे जनता के दरवाजे तक ले जाने की व्यवस्था की गई है:
- तय शेड्यूल पर शिविर: हर महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को पंचायतों में शिविर आयोजित किए जाएंगे.
- बड़े अधिकारियों की मौजूदगी: शिविर में केवल पंचायत स्तरीय कर्मी नहीं, बल्कि जिला स्तरीय वरीय नोडल अधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO), अंचलाधिकारी (CO) और स्थानीय पुलिस पदाधिकारी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहकर जनसमस्याओं की सुनवाई करेंगे.
सहयोग पोर्टल से जुड़ेगा हर मामला, सीएम सचिवालय से सीधी मॉनिटरिंग
प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए तकनीकी निगरानी का सहारा लिया गया है:
- ऑनलाइन एंट्री: शिविर में प्राप्त प्रत्येक आवेदन को अनिवार्य रूप से 'सहयोग पोर्टल' पर तुरंत अपलोड किया जाएगा.
- रियल-टाइम ट्रैकिंग: इन सभी शिकायतों के निष्पादन की स्थिति की रियल-टाइम मॉनिटरिंग सीधे मुख्यमंत्री सचिवालय स्तर से की जाएगी.
- समय-सीमा और लिखित सूचना: संबंधित विभागों को निर्धारित समय-सीमा (टाइमलाइन) के भीतर शिकायतों का समाधान करना होगा. मामला निष्पादित होते ही आवेदक को लिखित रूप से इसकी सूचना दी जाएगी.
शिविर से 30 दिन पहले ही शुरू हो जाएगी प्रक्रिया
समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए अग्रिम कार्ययोजना बनाई गई है:
- एडवांस आवेदन संग्रह: शिविर की तिथि से 30 दिन पूर्व से ही पंचायत स्तर पर आवेदन लिए जाएंगे, ताकि शिविर के दिन तक अधिकांश मामलों में फील्ड वेरिफिकेशन पूरा कर मौके पर ही उनका अंतिम निष्पादन किया जा सके.
- लापरवाही पर सीधी कार्रवाई: जिला प्रशासन ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि शिकायतों के निपटारे में हीलाहवाली या कोताही बरतने वाले कर्मियों और पदाधिकारियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी.
