लखीसराय. सदर अस्पताल में गर्भवती महिलाओं को जटिल प्रसव की स्थिति में स्थानीय स्तर पर ही आपातकालीन शल्य चिकित्सा की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है. अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. अमित कुमार के अनुसार विशेषज्ञ डॉक्टरों, एनेस्थेटिस्ट और प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की 24 घंटे उपलब्धता के साथ आधुनिक ऑपरेशन थिएटर और नि:शुल्क चिकित्सा सेवाओं को मजबूत किया गया है. इसका असर सिजेरियन प्रसव के आंकड़ों में भी दिखाई दे रहा है.
सिजेरियन प्रसव का आंकड़ा 43.50 से बढ़कर 75.37 प्रतिशत
डॉ. अमित कुमार के अनुसार वर्ष 2024-25 में सदर अस्पताल में सिजेरियन प्रसव का आंकड़ा 43.50 प्रतिशत था. वर्ष 2025-26 में इसमें 31.87 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह आंकड़ा 75.37 प्रतिशत तक पहुंच गया. अस्पताल प्रशासन का कहना है कि जटिल प्रसव के मामलों में समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा मिलने से मरीजों को दूसरे शहरों के अस्पतालों में जाने की जरूरत कम हुई है.
24 घंटे उपलब्ध हैं विशेषज्ञ डॉक्टर और स्टाफ
अस्पताल उपाधीक्षक ने बताया कि पहले जटिल प्रसव के मामलों में गर्भवती महिलाओं को पटना, मुंगेर या भागलपुर के निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता था. इससे परिवारों पर उपचार का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता था. अब सदर अस्पताल में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, एनेस्थेटिस्ट और प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की 24 घंटे उपलब्धता सुनिश्चित की गई है. इसके अलावा आधुनिक ऑपरेशन थिएटर और नि:शुल्क स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण से आपातकालीन प्रसव में सुविधा बढ़ी है.
जागरूकता बढ़ने का भी दिखा असर
अस्पताल प्रशासन के अनुसार ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में मातृ स्वास्थ्य को लेकर जन-जागरूकता बढ़ाने के प्रयासों के भी सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं. गर्भवती महिलाओं को सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं और संस्थागत प्रसव के लिए प्रेरित किया जा रहा है.
सुरक्षित प्रसव के बाद लाभार्थी ने जताया आभार
सदर अस्पताल में सुरक्षित प्रसव कराने वाली लाभार्थी मनीषा कुमारी ने बताया कि प्रसव पीड़ा होने पर वह आशा कार्यकर्ता के साथ सदर अस्पताल पहुंचीं. स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं को देखते हुए चिकित्सकों ने सिजेरियन प्रसव की सलाह दी. मनीषा के अनुसार शुरुआत में परिवार के सदस्य और उनके पति घबरा गए थे, लेकिन डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने धैर्य एवं संवेदनशीलता के साथ उनका सुरक्षित ऑपरेशन कराया. उन्होंने बताया कि उन्हें और नवजात बच्चे को नि:शुल्क इलाज, दवाएं और पौष्टिक भोजन भी उपलब्ध कराया गया, जिससे परिवार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ा.
सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का असर
जिला कार्यक्रम प्रबंधक सुधांशु नारायण लाल ने बताया कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान और जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम जैसी सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिली है. इन योजनाओं के तहत गर्भवती महिलाओं को नि:शुल्क जांच, उपचार, दवाएं, भोजन और एंबुलेंस परिवहन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार बेहतर बनाने और मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए प्रयास जारी हैं.
