रामगढ़ चौक. प्रखंड किसानों के बीच सरकार के द्वारा अनुदानित दर पर प्राप्त होने वाले धान के बीच का वितरण किया जा रहा है. जिसमें अभी तक कुल 12 क्विंटल धान का वितरण 40 किसानों के बीच सबौर संपन्न धान के बीज का वितरण किया गया. वितरण कार्य में कार्यपालक सहायक सुब्रत कुमार, कृषि समन्वयक जितेंद्र कुमार झा, चंद्रभूषण कुमार, कृषि सलाहकार वरुण कुमार, अजय कुमार, मदन पासवान, संजय चौधरी एवं संजय रविदास के द्वारा अपने-अपने क्षेत्र के किसानों के बीच जाकर धान के बीज की गुणवत्ता के बारे में जानकारी देकर किसानों के बीच वितरण का कार्य किया जा रहा है. सबौर संपन्न धान के बीज के बारे में जानकारी देते हुए कृषि वैज्ञानिक हलसी सुधीर कुमार ने बताया कि गंगा, कावेरी, नाटी, मंसूरी का सौ प्रतिशत रिप्लेस करने वाला धान का बीज है. सबौर संपन्न का परीक्षण हलसी के किसानों के बीच पिछले दो साल से हो रहा है और लोग अब काफी मात्रा में इस बीज को लगाना भी प्रारंभ कर दिये हैं, लेकिन रामगढ़ चौक प्रखंड के लिए यह अभी पहली बार है. इसलिए किसान बेहिचक बीज का उठाव कर 20 जून के बाद बिचड़ा गिरायें एवं अगले 20 जुलाई से धान की रोपाई करें. यह धान 145 दिन का है. इसकी उपज क्षमता 60 से 65 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है एवं इसमें रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक है. जैसे नाटी, मंसूरी धान में गेलकी एवं भनकी रोग लग जाने से फसल पूरी तरह से साफ हो जाता है, लेकिन इसमें रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होने के कारण यह बीमारी नहीं लगती है. यह धान उपज होने जाने के बाद गिरता भी नहीं है. जिसके कारण हार्वेस्टिंग की कटाई में शत प्रतिशत धान किसानों के हाथ लग जाते हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि इस धान में अगर रोपाई के बाद बारिश कम भी होता है तो आप बोरिंग से 10 दिन के अंतराल में भी अगर खेत को सिर्फ नमी भी रखते हैं तो भी इसके ऊपर पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा. अगर कहीं रोपाई के तुरंत बाद वैसी जमीन जो अधिक गड्ढा में है और अधिक बारिश हो गयी, पानी में डूब गया. 10 से 15 दिन तक पानी में डूबे रहने के बावजूद भी खेत से पानी निकलने पर धान की उपज पर कोई असर नहीं पड़ता है. कभी-कभी धान कटाई से पूर्व भी मौसम में परिवर्तन होने के कारण फसल तैयार हो जाने के बाद बारिश हो जाती है. जिसके कारण धान झड़ने का अधिक डर रहता है, लेकिन इस सबौर संपन्न धान में झड़ने की थोड़ी भी समस्या नहीं होती है. इसका चावल भोजन के लिए बहुत ही स्वादिष्ट होता है. इसलिए सभी किसानों को यह ध्यान जरूर रखना चाहिये.
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