Gita Pravachan Concludes: सूर्यगढ़ा (लखीसराय). प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, भिरहा की ओर से मेदनी चौकी के अमरपुर ठाकुरबाड़ी मैदान में आयोजित सात दिवसीय प्रवचनमाला एवं द्वादश ज्योतिर्लिंग दर्शन मेला का समापन बुधवार को हुआ. समापन सत्र में श्रद्धालुओं को गीता के सातवें अध्याय के आध्यात्मिक रहस्यों की विस्तृत जानकारी दी गई.
'कार्यक्रम का अंत नहीं, नई शुरुआत है'
राजयोगिनी बीके कंचन दीदी ने अपने प्रवचन में कहा कि किसी भी आध्यात्मिक कार्यक्रम का उद्देश्य केवल ज्ञान सुनना नहीं, बल्कि उसे जीवन में उतारना है. उन्होंने कहा कि कार्यक्रम का समापन अवश्य हो रहा है, लेकिन यह अंत नहीं बल्कि एक नई आध्यात्मिक शुरुआत है. यदि प्राप्त ज्ञान को दैनिक जीवन में अपनाया जाए, तभी आयोजन की वास्तविक सफलता मानी जाएगी.
राजयोग से मिलता है आत्मिक बल
उन्होंने कहा कि जब मनुष्य स्वयं को आत्मा मानकर परमात्मा शिव से राजयोग का संबंध स्थापित करता है, तब उसके जीवन में शांति, प्रेम, पवित्रता और आत्मिक शक्ति का संचार होता है. उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से नियमित रूप से राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास करने की अपील की.
योग, मेडिटेशन और प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र
कार्यक्रम के दौरान शारीरिक व्यायाम, योग और राजयोग मेडिटेशन सत्र का आयोजन किया गया. नशा मुक्ति प्रदर्शनी, योगिक खेती प्रदर्शनी, द्वादश ज्योतिर्लिंग दर्शन मेला तथा आध्यात्मिक पुस्तक स्टॉल श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बने रहे. बड़ी संख्या में लोगों ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर आध्यात्मिक और सामाजिक संदेश ग्रहण किया.
7 अगस्त से मिलेगा निःशुल्क राजयोग प्रशिक्षण
आयोजकों ने बताया कि 7 अगस्त से भिरहा एवं अमरपुर सेवा केंद्रों पर प्रतिदिन सुबह, दोपहर और शाम के सत्रों में निःशुल्क राजयोग मेडिटेशन का प्रशिक्षण दिया जाएगा. इसके लिए बड़ी संख्या में लोगों ने अपना पंजीकरण भी कराया है.
सभी सहयोगियों का जताया आभार
Gita Pravachan Concludes: समापन समारोह के अंत में आयोजकों ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने वाले प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवकों, श्रद्धालुओं और क्षेत्रवासियों के प्रति आभार व्यक्त किया तथा भविष्य में भी ऐसे आध्यात्मिक आयोजनों में सहभागिता की अपील की.
