लखीसराय में पिता और भाई को खोने के बाद भी नहीं टूटी हिम्मत, सुमन कुमारी ने हासिल की पीएचडी

Lakhisarai News : लखीसराय में जिंदगी के सबसे कठिन दौर में जब पिता और भाई का साया सिर से उठ गया, तब भी लखीसराय की सुमन कुमारी ने हार नहीं मानी. संघर्ष, साहस और मजबूत इरादों के दम पर उन्होंने अर्थशास्त्र में पीएचडी हासिल कर नई मिसाल कायम की है.

Lakhisarai News : सूर्यगढ़ा (लखीसराय) से राजेश कुमार गुप्ता की रिपोर्ट — कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों तो मुश्किलें भी रास्ता नहीं रोक पातीं. लखीसराय जिले के सूर्यगढ़ा नगर परिषद क्षेत्र के सलेमपुर गांव की बहू सुमन कुमारी ने इसे सच साबित कर दिखाया है. पिता और भाई की सड़क हादसे में मौत के गहरे सदमे के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और अर्थशास्त्र में पीएचडी की उपाधि हासिल कर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया.

दर्द को ताकत बनाकर हासिल की मंजिल

सुमन कुमारी के जीवन में वह दौर बेहद कठिन था, जब पीएचडी के दौरान ही सड़क दुर्घटना में उनके पिता और भाई का निधन हो गया. यह हादसा उनके लिए बड़ा भावनात्मक झटका था. खास बात यह रही कि उनके भाई इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर थे और सुमन के लिए प्रेरणास्रोत भी. लेकिन दुखों के इस पहाड़ के सामने झुकने के बजाय उन्होंने अपने सपनों को ताकत बना लिया.

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से शुरू हुआ सफर

सुमन ने अपनी प्रारंभिक उच्च शिक्षा प्रतिष्ठित इलाहाबाद विश्वविद्यालय से प्राप्त की. वहीं से उन्होंने अर्थशास्त्र में स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उन्होंने मगध विश्वविद्यालय से “बिहार में महिला सशक्तिकरण पर स्वयं सहायता समूहों का सामाजिक-आर्थिक प्रभाव, विशेष रूप से औरंगाबाद जिले के संदर्भ में” विषय पर शोध कर पीएचडी की डिग्री हासिल की.

शिक्षा के क्षेत्र में पति-पत्नी दोनों व्याख्याता

वर्तमान में सुमन कुमारी श्री कृष्ण जुबली लॉ कॉलेज, मुजफ्फरपुर में अर्थशास्त्र की व्याख्याता हैं. उनके पति रवीश कुमार भी उसी कॉलेज में व्याख्याता के पद पर कार्यरत हैं. परिवार और शिक्षा दोनों जिम्मेदारियों के बीच सुमन ने अपने शोध कार्य को पूरा कर महिला सशक्तिकरण की मजबूत मिसाल पेश की है.

महिलाओं के लिए बनी प्रेरणा

औरंगाबाद जिले की मूल निवासी सुमन कुमारी की सफलता आज उन महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई है, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करने का साहस रखती हैं. उनकी उपलब्धि पर सूर्यगढ़ा विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी रविशंकर प्रसाद सिंह उर्फ अशोक सिंह, शिक्षाविद प्रोफेसर अंजनी आनंद, शिक्षक ललन कुमार सिंह और कई सामाजिक लोगों ने शुभकामनाएं दी हैं.

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लेखक के बारे में

Published by: Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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