लखीसराय में 60 डिसमिल जमीन नहीं मिलने से अटका खेल मैदान, युवाओं में बढ़ रही निराशा

Lakhisarai News: बिहार में ‘खेलेगा बिहार, खिलेगा बिहार’ का नारा जोर पकड़ रहा है, लेकिन लखीसराय के कस्बा पंचायत में खेल मैदान के लिए जमीन तक नहीं मिल पा रही. महीनों से योजना फाइलों में अटकी है और ग्रामीण युवाओं का भविष्य अधर में लटका हुआ है.

Lakhisarai News : पीरी बाजार (लखीसराय) से रवि राज आनंद की रिपोर्ट — लखीसराय जिले के पीरी बाजार थाना क्षेत्र अंतर्गत अभयपुर के कस्बा पंचायत में खेल मैदान निर्माण की योजना जमीन के अभाव में ठप पड़ी है. सरकार जहां ग्रामीण स्तर पर खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने की बात कर रही है, वहीं कस्बा पंचायत के युवा आज भी अभ्यास के लिए उचित मैदान का इंतजार कर रहे हैं. महीनों से प्रस्तावित खेल मैदान की योजना केवल इसलिए आगे नहीं बढ़ पा रही क्योंकि प्रशासन को 60 डिसमिल जमीन उपलब्ध नहीं हो सकी है.

मैदान नहीं, तो कैसे निखरेंगी प्रतिभाएं?

कस्बा पंचायत के युवाओं का कहना है कि गांव में खेल मैदान नहीं होने के कारण उन्हें अभ्यास करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. क्रिकेट, फुटबॉल और एथलेटिक्स जैसी गतिविधियों के लिए उन्हें सड़क किनारे या खाली खेतों का सहारा लेना पड़ता है. कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी संसाधनों के अभाव में अपने सपनों को छोड़ने पर मजबूर हैं.

सरकारी योजना जमीन के अभाव में फंसी

जब इस मुद्दे पर पंचायत रोजगार सेवक कन्हैया कुमार से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि सरकार के मानकों के अनुसार खेल मैदान निर्माण के लिए कम से कम 60 डिसमिल जमीन जरूरी है. फिलहाल पंचायत क्षेत्र में इतनी जमीन उपलब्ध नहीं हो पा रही है. उन्होंने कहा कि जैसे ही उपयुक्त सरकारी या अधिग्रहित जमीन मिलेगी, निर्माण कार्य तुरंत शुरू कर दिया जाएगा.

ग्रामीणों ने उठाए बड़े सवाल

स्थानीय लोगों और खेल प्रेमियों का कहना है कि डिजिटल इंडिया और खेलो इंडिया के दौर में अगर एक पंचायत में खेल मैदान के लिए जमीन नहीं मिल पा रही है, तो यह व्यवस्था पर बड़ा सवाल है. युवाओं का कहना है कि सरकार ग्रामीण प्रतिभाओं को मंच देने की बात तो करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात अब भी बदले नहीं हैं.

प्रशासन से जल्द समाधान की मांग

ग्रामीणों और खेल प्रेमियों ने जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मामले में हस्तक्षेप की मांग की है. उनका कहना है कि यदि जल्द जमीन की व्यवस्था नहीं की गई, तो पंचायत के युवाओं का भविष्य प्रभावित होगा. लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन इस समस्या का जल्द समाधान निकालकर खेल मैदान निर्माण का रास्ता साफ करेगा.

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लेखक के बारे में

Published by: Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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