लखीसराय जिले के सूर्यगढ़ा और मेदनीचौकी प्रखंड क्षेत्र से होकर गुजरने वाली किऊल नदी इन दिनों रौद्र रूप में है. लगातार हो रही बारिश और ऊपरी इलाकों से पानी आने के कारण नदी के जलस्तर में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की जा रही है. सुरक्षा तटबंध के करीब पानी लबालब भर चुका है और पिछले 24 घंटे के भीतर लगभग एक फीट जलस्तर और बढ़ गया है. इससे तटबंध से सटे गांवों में बाढ़ की दहशत फैल गई है, वहीं दियारा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर लगी नकदी फसलें जलमग्न होकर पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं.
दियारा में परवल और भदई मकई की फसल तबाह, किसानों की डूबी पूंजी
देवघरा घाट और आसपास के दियारा इलाके में बाढ़ के पानी ने किसानों की कमर तोड़ दी है:
- फसलों का भारी नुकसान: दियारा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर लगी परवल की तैयार फसल बाढ़ के पानी में डूबकर सड़ गई है. इसके साथ ही भदई मकई की फसल भी पूरी तरह जलमग्न हो चुकी है.
- आर्थिक संकट: अचानक आए इस उफान के कारण किसानों की खून-पसीने की मेहनत और लगी हुई लागत पूंजी दोनों डूब गई है, जिससे किसानों के सामने भारी आर्थिक संकट खड़ा हो गया है.
- चारा संकट और पशुपालक परेशान: बाढ़ के पानी में पशुचारा डूब जाने से पशुपालकों के सामने चारे की गंभीर किल्लत हो गई है. लोग अपने मवेशियों को सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर ले जाने के लिए मजबूर हैं.
पानी से चारों तरफ घिरा परोरा टोला, नावों की आवाजाही बढ़ी
मेदनीचौकी के ठीक सामने किऊल नदी के पार बसे गांवों की स्थिति बेहद नाजुक हो गई है:
- टापू बना परोरा टोला: परोरा टोला चारों ओर से बाढ़ के पानी से घिर चुका है. यदि जलस्तर में और वृद्धि होती है, तो ग्रामीणों को अपना घर छोड़कर मेदनीचौकी मुख्य बाजार की ओर शरण लेनी पड़ेगी.
- घाटों पर नावें सक्रिय: आवागमन के लिए अब नाव ही एकमात्र सहारा बची है. देवघरा और आसपास के घाटों पर नाविकों की सक्रियता बढ़ गई है.
तटबंध की सुरक्षा को लेकर ग्रामीणों में खौफ, निगरानी की मांग
नदी में पानी के तेज बहाव और बढ़ते दबाव को देखकर तटवर्ती इलाकों के ग्रामीण बेहद डरे हुए हैं:
- दहशत का माहौल: तटबंध से सटकर पानी का स्तर लगातार ऊपर चढ़ रहा है, जिससे बांध टूटने या रिसाव का खतरा मंडराने लगा है.
- प्रशासन से गुहार: ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग से सुरक्षा तटबंध की 24 घंटे विशेष निगरानी रखने तथा कमजोर व जर्जर हिस्सों की तत्काल मरम्मत कराने की मांग की है.
