Ashokdham Mandir Bihar: लखीसराय जिले के अशोकधाम मंदिर के पास मची भगदड़ में 7 महिलाओं की मौत हो गई. जबकि कई श्रद्धालु घायल हैं, जिनका इलाज जारी है. जिले का प्रसिद्ध अशोक धाम मंदिर इन दिनों श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र बना हुआ है. सुबह होते ही मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ जुटने लगती है. श्रद्धालु बाबा भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए लंबी कतारों में खड़े नजर आते हैं.
काला पत्थर बना आकर्षण का केंद्र
अशोक धाम में स्थापित काले पत्थर का विशाल शिवलिंग श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण है. मान्यता है कि यह देश के सबसे बड़े शिवलिंगों में से एक है. हर रोज बड़ी संख्या में भक्त यहां जल और दूध अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. खासकर सावन का महीने होने और आज तीसरी सोमवारी होने की वजह से श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी थी.
मंदिर की ये है मान्यता
यह अपने अंदर सदियों पुराना इतिहास भी समेटे हुए है. मान्यता है कि यहां स्थित शिवलिंग की स्थापना 8वीं शताब्दी में हुई थी. पाल वंश के सम्राट नारायण पाल ने यहां नियमित पूजा-अर्चना शुरू करवाई थी. बाद में 12वीं शताब्दी में राजा इंद्रद्युम्न ने यहां भव्य मंदिर बनवाया. कहा जाता है कि उन्होंने लाल पहाड़ी स्थित अपने राजमहल से मंदिर तक एक गुप्त सुरंग भी बनवाई थी.
मुगल काल में मंदिर के नष्ट होने के बाद यह जगह लंबे समय तक गुमनामी में रहा. फिर 7 अप्रैल 1977 को एक ऐसी घटना हुई, जिसने इस जगह का इतिहास बदल दिया. स्थानीय चरवाहा अशोक गिल्ली-डंडा खेल रहा था. खेलते समय उसकी गिल्ली झाड़ियों में चली गई. गिल्ली खोजते-खोजते उसकी नजर जमीन में दबे एक विशाल शिवलिंग पर पड़ी. यही खोज आगे चलकर इस पवित्र स्थल के नाम की वजह बनी और इसे ‘अशोक धाम’ कहा जाने लगा.
श्रृंगारी पूजा में दिखता है बाबा का भव्य रूप
मंदिर के गर्भगृह में होने वाली 'श्रृंगारी पूजा' भक्तों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र है. इस दौरान बाबा भोलेनाथ का ताजे फूलों, सुंदर वस्त्रों, मुकुट और नाग देवता की प्रतिमा से भव्य श्रृंगार किया जाता है. पुजारियों के मंत्रोच्चार और कीर्तन के बीच यह पूजा संपन्न होती है. मंदिर में विशेष धार्मिक अनुष्ठानों का भी आयोजन होता है. श्रद्धालु विधि-विधान से दुग्धाभिषेक, जलाभिषेक और बेलपत्र अर्पित कर महामृत्युंजय मंत्र का जाप कराते हैं.
मन मोह लेता है संध्या आरती का नजारा
सूर्यास्त के बाद होने वाली दैनिक संध्या आरती का दृश्य बेहद मनमोहक होता है. आरती की रोशनी, शंख और घंटियों की आवाज के बीच भक्तों के जयकारे पूरे परिसर को शिवमय कर देते हैं. मंदिर के बाहर सजी दुकानों पर भी दिनभर चहल-पहल बनी रहती है. पूजा सामग्री, पेड़ा और प्रसाद खरीदने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुट रही है. खासकर महिला श्रद्धालुओं की अच्छी खासी संख्या देखने को मिल रही है.
