जिले के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में भी अब स्वास्थ्य सेवाएं हो रहीं मजबूत

महिलाएं अपने नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में उपलब्ध प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के बारे में जागरूक नहीं रहने के कारण लाभ नहीं ले पा रही थीं.

पिपरिया. कभी-कभी हम सब किसी जानकारी के अभाव में उपलब्ध सुविधाओं का लाभ नहीं उठा पाते हैं. ठीक इसी तरह जिले के पिपरिया क्षेत्र में महिलाएं अपने नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में उपलब्ध प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के बारे में जागरूक नहीं रहने के कारण लाभ नहीं ले पा रही थीं. यहां की महिलाएं ये कहती हैं पिपरिया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की बीसीएम नुसरत प्रवीण बताती हैं कि स्वास्थ्य केंद्र में सुविधा होते हुए भी महिलाएं जागरूकता के अभाव में स्वास्थ्य लाभ लेने से वंचित रह जा रहीं हैं.

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के द्वारा मिली नयी जिंदगी

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान से लाभान्वित होने वाली वलीपुर गांव की 25 वर्षीय नेहा कुमारी बताती है कि जब वह मां बनने वाली थी तो उसे अपनी खुशी का ठिकाना नहीं रहा. पर इस दौरान वह हाइपर टेंशन की शिकार हो गयी. वह इस खतरे से अंजान थी. उसे यह पता नहीं था कि इसका असर उसके होने वाले बच्चे पर भी होगा. इस दौरान बीसीएम नुसरत प्रवीण ने उन्हें गर्भावस्था के दौरान बरतने वाली सावधानियों के बारे में बताया. साथ ही इस दौरान ली जाने वाली पौष्टिक आहार के बारे में भी बताया. नेहा कहती हैं वह तो इस बात से भी अनजान थी कि गर्भावस्था के दौरान खान-पान का भी ध्यान रखना पड़ता है. आज वह एक स्वस्थ बच्चे की मां बनी हैं वो इसी का प्रतिफल है.

अब सुदूरवर्ती इलाके में भी मिल रही है स्वास्थ्य सुविधा

रामचंद्रपुर गांव निवासी राजेश कुमार कहते हैं कि वे सब जिस क्षेत्र में रहते है वो दियारा का इलाका है. बावजूद यहां भी हर प्रकार की स्वास्थ्य सुविधाएं आज मिल रही है. इतना ही नहीं केंद्र से बेहतर उपचार के लिए अगर सदर अस्पताल भेजा जाता है. तो इसके लिए मरीजों को एंबुलेंस की सुविधा प्रदान की जाती है.

क्या है प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान

पिपरिया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ संजय कुमार ने बताया कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत गर्भवती महिलाओं को सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर उनकी गर्भावस्था के दूसरी एवं तीसरी तिमाही की अवधि (गर्भावस्था के चार महीने के बाद) के दौरान प्रसव पूर्व देखभाल करना होता है. क्योंकि सुरक्षित मातृत्व के लिए प्रसव पूर्व जांच की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है. ये हर माह की 9 एवं 21 तारीख को पीएचसी के साथ हेल्थ एंड वेलनेस एवं सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर निशुल्क की जाती है. गर्भवती महिलाओं की चारों प्रसव पूर्व जांच, माता एवं उसके गर्भस्थ शिशु की स्थिति स्पष्ट करती और संभावित जटिलताओं का पता चलता है. लक्षणों के मुताबिक जरूरी चिकित्सकीय प्रबंधन किया जाता है ताकि मां एवं शिशु दोनों स्वस्थ रहें.

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By Prabhat khabar news desk

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