लखीसराय के बालाजी सीटेड एकेडमी में बच्चों को शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति और संस्कारों से जोड़ने की पहल की जा रही है. एकेडमी प्रबंधन की ओर से प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को छात्र-छात्राओं के लिए सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ का आयोजन किया जाता है. पाठ के दौरान एकेडमी परिसर भक्तिमय माहौल में बदल जाता है और विद्यार्थी पूरे उत्साह के साथ इसमें भाग लेते हैं. प्रबंधन का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य बच्चों में नैतिक मूल्यों, अनुशासन, सकारात्मक सोच और भारतीय संस्कृति के प्रति जुड़ाव विकसित करना है.
मंगलवार और शनिवार को होता है सामूहिक पाठ
लखीसराय. बालाजी सीटेड एकेडमी में प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को छात्र-छात्राएं एक साथ एकत्रित होकर सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं. निर्धारित समय पर विद्यार्थी एक स्थान पर जुटते हैं और श्रद्धा भाव के साथ पाठ में शामिल होते हैं.
सामूहिक पाठ के दौरान एकेडमी परिसर में आध्यात्मिक और सकारात्मक वातावरण देखने को मिलता है. विद्यार्थियों में भी इस गतिविधि को लेकर खासा उत्साह नजर आता है.
शिक्षा के साथ संस्कारों पर जोर
एकेडमी प्रबंधन का कहना है कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं है. बच्चों में शिक्षा के साथ संस्कार, अनुशासन, आत्मविश्वास और नैतिक मूल्यों का विकास भी जरूरी है.
इसी उद्देश्य से विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों से परिचित कराने के लिए नियमित गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है.
सामूहिक पाठ से एकाग्रता और अनुशासन का प्रयास
प्रबंधन के अनुसार सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ कराने का उद्देश्य विद्यार्थियों में एकाग्रता और अनुशासन की भावना विकसित करना भी है. एक साथ पाठ करने से बच्चों में समूह के साथ मिलकर गतिविधि करने और टीम भावना विकसित करने का अवसर मिलता है.
भारतीय संस्कृति से जोड़ने की पहल
एकेडमी प्रबंधन ने बताया कि बच्चों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और परंपराओं से जोड़ना अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसके माध्यम से विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराने और उनमें सकारात्मक मूल्यों को विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है.
आगे भी जारी रहेंगे ऐसे आयोजन
प्रबंधन ने कहा कि बच्चों के व्यक्तित्व विकास और उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनाने के उद्देश्य से इस तरह के आयोजन आगे भी जारी रखे जाएंगे. विद्यार्थियों की पढ़ाई के साथ उनके सामाजिक, नैतिक और सांस्कृतिक विकास पर भी ध्यान दिया जाएगा.