Lakhisarai News : लखीसराय जिले के सूर्यगढ़ा प्रखंड में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, भिड़हा की ओर से आयोजित 'श्रीमद्भगवद्गीता के आध्यात्मिक रहस्य द्वारा जीवन जीने की कला' प्रवचनमाला और 'द्वादश ज्योतिर्लिंग दर्शन मेला' में शुक्रवार को भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं, युवाओं और स्थानीय लोगों ने भाग लेकर आध्यात्मिक ज्ञान और राजयोग मेडिटेशन का संदेश ग्रहण किया.
गीता केवल ग्रंथ नहीं, जीवन जीने की कला है
प्रवचनमाला को संबोधित करते हुए ब्रह्माकुमारी राजयोगिनी बीके कंचन दीदी ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि श्रेष्ठ जीवन जीने का दिव्य मार्गदर्शन देने वाला ईश्वरीय ज्ञान है. उन्होंने कहा कि जब मनुष्य स्वयं को आत्मा और परमात्मा को अपना पिता मानकर राजयोग का अभ्यास करता है, तब उसके जीवन में शांति, प्रेम, सुख और आंतरिक शक्ति का संचार होता है.
तनावपूर्ण जीवन में राजयोग का संदेश
बीके कंचन दीदी ने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ते तनाव, मानसिक अशांति और नैतिक मूल्यों में गिरावट के बीच गीता का आध्यात्मिक संदेश समाज को नई दिशा प्रदान कर सकता है. उनके अनुसार राजयोग मेडिटेशन व्यक्ति के विचारों, संस्कारों और जीवनशैली में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रभावी माध्यम है, जिससे जीवन अधिक संतुलित और सुखद बन सकता है.
द्वादश ज्योतिर्लिंग दर्शन बना आकर्षण का केंद्र
कार्यक्रम के साथ आयोजित द्वादश ज्योतिर्लिंग दर्शन मेला श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. यहां श्रद्धालु विभिन्न ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कर आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त कर रहे हैं. इसके अलावा गो-आधारित प्राकृतिक कृषि, शाश्वत योगिक खेती, व्यसन मुक्ति और आध्यात्मिक चित्र प्रदर्शनी भी लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है. इन प्रदर्शनों के माध्यम से आध्यात्मिकता के साथ प्रकृति संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली का संदेश भी दिया जा रहा है.
आगामी दिनों में भी जारी रहेगा आयोजन
गौरतलब है कि इस कार्यक्रम का शुभारंभ गुरुवार को दीप प्रज्ज्वलन और ईश्वरीय स्मृति के साथ हुआ था. आयोजन समिति ने अधिक से अधिक लोगों से आगामी दिनों में भी प्रवचनमाला और दर्शन मेले में शामिल होकर आध्यात्मिक ज्ञान का लाभ उठाने की अपील की है. लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की भागीदारी इस आयोजन को क्षेत्र का प्रमुख आध्यात्मिक आकर्षण बना रही है.
