लखीसराय में बाढ़ ने किसानों की उम्मीदों पर फेरा पानी, 100 एकड़ से ज्यादा धान की फसल डूबी : सड़ने का बढ़ा खतरा

लखीसराय में बाढ़ का कहर जारी है. 100 एकड़ से अधिक धान की फसल डूब जाने से किसानों की उम्मीदें टूट गई हैं. लंबे समय तक पानी में डूबे रहने से फसल के सड़ने का खतरा मंडरा रहा है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है.

लखीसराय : जिले में बाढ़ की त्रासदी ने किसानों की मेहनत और उम्मीदों पर पानी फेर दिया है. लखीसराय और सूर्यगढ़ा प्रखंड में 100 एकड़ से अधिक क्षेत्र में लगी धान की फसल बाढ़ के पानी में डूब गयी है. खेतों में कई दिनों से पानी जमा रहने के कारण अब फसल के सड़ने और पूरी तरह बर्बाद होने का खतरा बढ़ गया है.

अमहरा से पीरी बाजार तक खेतों में भरा बाढ़ का पानी

मिली जानकारी के अनुसार सदर प्रखंड के अमहरा, साबिकपुर और गढ़ी बिशनपुर के रेहुआ गांव में धान की फसल पूरी तरह जलमग्न हो चुकी है. वहीं पोखरामा, उरैन, कजरा और पीरी बाजार का पूरा बहियार भी पानी में डूबा हुआ है. इन इलाकों में बड़े पैमाने पर धान की खेती की गयी है.

किसानों का कहना है कि इस बार फसल काफी अच्छी थी और बंपर उत्पादन की उम्मीद थी, लेकिन बाढ़ ने पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया. किसानों को प्राकृतिक आपदा के कारण भारी नुकसान की आशंका है और फिलहाल खेतों से पानी निकलने का इंतजार करने के अलावा उनके पास कोई विकल्प नजर नहीं आ रहा है.

गंगा का जलस्तर बढ़ने से नहीं घट रहा नदियों का पानी

सिमरिया, मरांची और बड़हिया इलाके में गंगा का रौद्र रूप बना हुआ है. हाथीदह में एनएच-80 पर भी बाढ़ का पानी बह रहा है. ऐसे में फिलहाल जलस्तर तेजी से घटने की संभावना कम नजर आ रही है.

स्थानीय लोगों के अनुसार जब तक गंगा का जलस्तर नहीं घटेगा, तब तक किऊल और हरुहर नदी के पानी में भी कमी आने की संभावना कम है. इसका सीधा असर खेतों पर पड़ रहा है और धान की फसल लंबे समय तक पानी में डूबी रहने की आशंका है.

किसानों ने जतायी फसल सड़ने की चिंता

किसानों का कहना है कि बाढ़ का पानी खेतों में लंबे समय तक जमा रहने से धान की फसल खराब हो सकती है. उनका दावा है कि इस बार पानी की स्थिति ऐसी है कि डूबी हुई फसल को ज्यादा नुकसान पहुंचने की आशंका है.

कृषि वैज्ञानिक सुधीर चंद्र चौधरी ने भी कहा कि धान की फसल का लंबे समय तक पानी में डूबे रहना नुकसानदायक होता है. इससे फसल में सड़न की समस्या बढ़ सकती है और उत्पादन पूरी तरह प्रभावित होने का खतरा रहता है.

अगले एक सप्ताह तक पानी रहने की आशंका

बताया जा रहा है कि खेतों में अगले एक सप्ताह तक बाढ़ का पानी जमा रहने की संभावना है. यदि इस दौरान जलस्तर में कमी नहीं आती है तो धान की फसल को और नुकसान हो सकता है. किसानों की नजर अब गंगा समेत किऊल और हरुहर नदी के जलस्तर पर टिकी है.

बाढ़ से फसल नुकसान के मुख्य बिंदु

  • लखीसराय और सूर्यगढ़ा प्रखंड में 100 एकड़ से अधिक धान की फसल जलमग्न.
  • अमहरा, साबिकपुर और रेहुआ में खेतों में पूरी तरह पानी भरा.
  • पोखरामा, उरैन, कजरा और पीरी बाजार का बहियार भी जलमग्न.
  • गंगा के साथ किऊल और हरुहर नदी के पानी से बढ़ी परेशानी.
  • लंबे समय तक पानी में डूबे रहने से धान की फसल सड़ने का खतरा.
  • अगले एक सप्ताह तक खेतों में पानी रहने की आशंका.

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By Prabhat khabar news desk

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