लखीसराय : करीब दो दशक पुरानी बरियारपुर-मननपुर नई रेल लाइन परियोजना को दोबारा शुरू कराने की मांग उठने लगी है. करीब 250.55 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना को वर्ष 2007-08 में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के कार्यकाल में मंजूरी मिली थी. योजना के तहत मालदा रेल मंडल के मुंगेर जिले स्थित बरियारपुर से दानापुर रेल मंडल के लखीसराय जिले स्थित मननपुर रेलवे स्टेशन को जोड़ने के लिए 69 किलोमीटर नई रेल लाइन बिछायी जानी थी.
परियोजना के लिए वन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) और जमीन अधिग्रहण समेत कई जरूरी कार्य बिहार सरकार को कराने थे. लेकिन जमीन अधिग्रहण, अतिक्रमण मुक्त जमीन और वन विभाग की एनओसी की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी.
बरियारपुर से मननपुर वाया खड़गपुर-लक्ष्मीपुर-बांका रेल लाइन की थी योजना
प्रस्तावित रेल लाइन बरियारपुर-मननपुर वाया खड़गपुर, लक्ष्मीपुर और बारहट होकर बनायी जानी थी. परियोजना के तहत लखीसराय और जमुई जिले में सर्वे, खंभा लगाने और मिट्टी भराई जैसे शुरुआती कार्य भी किये गये थे.
उपलब्ध जानकारी के अनुसार मार्च 2018 तक इस परियोजना पर 19.23 करोड़ रुपये खर्च हो चुके थे. शुरुआती चरण में करीब 18 से 20 करोड़ रुपये की राशि सर्वे, मिट्टी भराई और अन्य कार्यों पर खर्च होने की बात सामने आयी थी. इसके बाद जमीन से जुड़ी बाधाओं के कारण काम आगे नहीं बढ़ सका.
परियोजना पूरी हुई तो भागलपुर-किऊल रेल दूरी होगी कम
बरियारपुर-मननपुर रेल लाइन बनने से भागलपुर से किऊल जाने वाले रेल यात्रियों को करीब 18 किलोमीटर की दूरी कम तय करनी पड़ सकती है. इससे यात्रियों के समय की भी बचत होगी और कई यात्रियों को ट्रेन बदलने की परेशानी से राहत मिलने की उम्मीद है.
नई रेल लाइन बनने से भागलपुर-जसीडीह रेलखंड को भी फायदा मिल सकता है. इस रूट पर ट्रेनों की संख्या बढ़ाने और रेल संपर्क को बेहतर करने की संभावना बनेगी. साथ ही मुंगेर, जमुई और लखीसराय के कई इलाकों को भी सीधा रेल संपर्क मिलने का लाभ मिल सकता है.
संसद में भी उठ चुका है परियोजना शुरू करने का मामला
इस लंबित रेल परियोजना को दोबारा शुरू कराने का मामला जमुई सांसद अरुण भारती ने संसद में उठाया था. इसके जवाब में रेल मंत्री ने कहा था कि परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए बिहार सरकार की ओर से वन विभाग की एनओसी, जमीन अधिग्रहण और जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराना जरूरी है.
रेल मंत्रालय के जवाब के बाद अब एक बार फिर इस परियोजना को शुरू कराने की मांग तेज हो रही है. स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों पहले स्वीकृत इस परियोजना पर शुरुआती राशि खर्च होने के बावजूद काम अधूरा पड़ा है. यदि जमीन और वन विभाग से जुड़ी बाधाओं को दूर कर परियोजना को दोबारा गति दी जाती है, तो इसका सीधा लाभ इस क्षेत्र के हजारों रेल यात्रियों को मिल सकता है.
परियोजना के मुख्य बिंदु
- परियोजना की स्वीकृति : वर्ष 2007-08
- अनुमानित लागत : 250.55 करोड़ रुपये
- प्रस्तावित नई रेल लाइन : 69 किलोमीटर
- रूट : बरियारपुर-मननपुर वाया खड़गपुर-लक्ष्मीपुर-बारहट
- मार्च 2018 तक खर्च : 19.23 करोड़ रुपये
- प्रमुख बाधा : जमीन अधिग्रहण, अतिक्रमण मुक्त जमीन और वन विभाग की एनओसी
- संभावित लाभ : भागलपुर-किऊल दूरी करीब 18 किमी कम होने की उम्मीद
