लखीसराय. बरियारपुर से मननपुर को जोड़ने वाली करीब 17 साल पुरानी रेल परियोजना को दोबारा चालू कराने की मांग फिर जोर पकड़ने लगी है. वर्ष 2007-08 में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के कार्यकाल में करीब 250.55 करोड़ रुपये की लागत से 69 किलोमीटर नई रेल लाइन बिछाने की योजना तैयार की गयी थी. प्रस्तावित रेल लाइन मालदा रेल मंडल के मुंगेर जिले के बरियारपुर से दानापुर रेल मंडल के लखीसराय जिले के मननपुर स्टेशन तक बिछायी जानी थी. परियोजना के लिए वन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र और भूमि अधिग्रहण की जिम्मेदारी बिहार सरकार को दी गयी थी, लेकिन आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी नहीं होने के कारण परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी.
बरियारपुर से मननपुर वाया खड़गपुर-लक्ष्मीपुर-बरहट बननी थी रेल लाइन
प्रस्तावित परियोजना के तहत बरियारपुर से मननपुर के बीच खड़गपुर, लक्ष्मीपुर और बरहट होते हुए नई रेल लाइन बिछाने की योजना थी. मार्च 2018 तक इस परियोजना पर 19.23 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके थे. लखीसराय और जमुई जिले में मिट्टी भराई, खंभे लगाने और सर्वे से जुड़े कार्य भी कराये गये थे. बताया जाता है कि इन प्रारंभिक कार्यों पर करीब 18 से 20 करोड़ रुपये खर्च हुए, लेकिन अतिक्रमण मुक्त जमीन उपलब्ध कराने, नो ड्यूज और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण परियोजना का काम आगे नहीं बढ़ सका.
भागलपुर से किऊल होकर जाने की दूरी होगी 18 किलोमीटर कम
बरियारपुर-मननपुर रेल परियोजना पूरी होने पर भागलपुर से किऊल होते हुए जमुई की रेल दूरी करीब 18 किलोमीटर कम होने की उम्मीद है. इससे यात्रियों के समय की बचत होगी और कई यात्रियों को ट्रेन बदलने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी.
परियोजना के पूरा होने से भागलपुर से जसीडीह रेलखंड पर रेल संपर्क और परिचालन को भी बेहतर करने की संभावना जतायी जा रही है. क्षेत्र के लोगों का कहना है कि नई रेल लाइन बनने से मुंगेर, जमुई और लखीसराय के बीच रेल कनेक्टिविटी को भी मजबूती मिलेगी.
सांसद ने संसद में उठाया परियोजना को फिर शुरू करने का सवाल
जमुई सांसद अरुण भारती ने बरियारपुर-मननपुर रेल परियोजना को फिर से शुरू करने का मुद्दा संसद में उठाया था. इसके जवाब में रेल मंत्री की ओर से कहा गया कि बिहार सरकार द्वारा वन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने, भूमि अधिग्रहण पूरा कराने और जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने के बाद ही परियोजना को आगे बढ़ाया जा सकता है.
वन विभाग की एनओसी और भूमि अधिग्रहण अब भी बड़ी बाधा
परियोजना के सामने सबसे बड़ी बाधा वन विभाग की एनओसी और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया बतायी जा रही है. इसके अलावा प्रस्तावित रेल लाइन के लिए आवश्यक जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराना भी जरूरी है. जब तक ये प्रक्रियाएं पूरी नहीं होतीं, रेल मंत्रालय की ओर से परियोजना को आगे बढ़ाना संभव नहीं बताया गया है.
17 साल बाद फिर उम्मीद, अब बिहार सरकार की कार्रवाई पर निगाह
करीब डेढ़ दशक से अधिक समय से लंबित इस परियोजना को लेकर स्थानीय लोगों में एक बार फिर उम्मीद जगी है. प्रारंभिक सर्वे और निर्माण से जुड़े कार्यों पर राशि खर्च होने के बावजूद परियोजना पूरी नहीं हो सकी. अब सांसद की ओर से मामला संसद में उठाये जाने के बाद लोगों की नजर बिहार सरकार और रेलवे के अगले कदम पर है. यदि वन विभाग की एनओसी, भूमि अधिग्रहण और अतिक्रमण मुक्त जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पूरी होती है तो बरियारपुर-मननपुर रेल परियोजना को फिर से गति मिलने की संभावना बन सकती है. इससे क्षेत्र के लोगों को बेहतर रेल संपर्क के साथ भागलपुर-जमुई रेल मार्ग पर दूरी और यात्रा समय कम होने का लाभ मिल सकता है.
Also Read : MLC चुनाव में अनंत सिंह ने बदला समीकरण, नीरज कुमार के सामने डॉ. अनुज सिंह का समर्थन
