लखीसराय में महिलाओं के लिए आस्था का चमत्कारी केंद्र, तालाब का जल पीने से दूर होते हैं मासिक धर्म रोग

Aaj Ka Darshan: लखीसराय के मननपुर गांव में सदियों पुरानी मान्यता. पूजा और तालाब का जल महिलाओं के लिए माना जाता है वरदान

Aaj Ka Darshan: चानन (लखीसराय) से रंजन पासवान की रिपोर्ट. Mananpur Kali Mandir और उससे सटा प्राचीन तालाब आज भी ग्रामीण आस्था और लोकविश्वास का बड़ा केंद्र बना हुआ है. भलुई पंचायत के मननपुर गांव स्थित इस मंदिर को लेकर ग्रामीणों के बीच ऐसी मान्यता है कि यहां पूजा-अर्चना कर तालाब का जल ग्रहण करने से महिलाओं के मासिक धर्म से जुड़े रोगों में राहत मिलती है. यही वजह है कि आसपास के गांवों से भी महिलाएं यहां मन्नत लेकर पहुंचती हैं.

1925 में हैजा से बचाव की कहानी आज भी जिंदा

ग्रामीण अरविंद सिंह बताते हैं कि करीब 1925 के आसपास गांव में हैजा का भयानक प्रकोप फैल गया था. उस समय काली मंदिर में बलि प्रथा अपने चरम पर थी. गांव की स्थिति इतनी भयावह हो गयी थी कि एक शव के अंतिम संस्कार के बाद लौटते-लौटते दूसरे की मौत की खबर मिल जाती थी. पूरे इलाके में डर और दहशत का माहौल था.

इसी दौरान बसुआचक गांव में हरि कीर्तन कर रहे संत स्वामी विवेकानंद जी को ग्रामीणों ने गांव बुलाया. ग्रामीणों के अनुसार संत ने सबसे पहले मंदिर में बलि प्रथा बंद करवाई और गांव में राख छिड़कने की सलाह दी. इसके बाद धीरे-धीरे मौतों का सिलसिला थम गया और गांव में फिर से सामान्य जीवन लौट आया. संत के मार्गदर्शन में हरि कीर्तन और धार्मिक आयोजन शुरू हुए, जिसे लोग आज भी गांव की खुशहाली से जोड़कर देखते हैं.

तालाब की पवित्रता और महिलाओं की आस्था

ग्रामीणों के अनुसार पहले यह मंदिर मिट्टी का था और गांव की आबादी भी काफी कम थी. समय के साथ मंदिर और तालाब का जीर्णोद्धार हुआ. तालाब को लेकर गांव में कई धार्मिक नियम भी थे. यहां दातून करना या गंदगी फैलाना पूरी तरह मना था. लोग इसी तालाब के पानी का उपयोग पीने और भोजन बनाने में करते थे.

आज भी महिलाओं के बीच यह विश्वास कायम है कि तालाब में स्नान कर मां काली की पूजा करने और जल ग्रहण करने से मासिक धर्म संबंधी परेशानियों में राहत मिलती है. ग्रामीण रामावतार साहू, गिरजा यादव और अन्य लोगों का कहना है कि सच्चे मन से मांगी गयी मन्नत यहां जरूर पूरी होती है.

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By Pratyush prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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