अपहृत व्यवसायी बंधुओं को मुक्त कराने में मिला था सहयोग
लखीसराय : 26 अक्तूबर की अहले सुबह अपहृत मार्बल व्यवसायी बंधु सुरेश व कपिल तक पुलिस के पहुंचाने में रंजीत डॉन के चंगुल से फरार हुए इलाहाबाद के नारायण काफी मददगार सिद्ध हुए. नारायण यादव के माध्यम से ही पुलिस की टीम कजरा के जंगल में पहुंच पायी थी और मार्बल व्यवसायी बंधुओं को बरामद किया था. नारायण यादव वाटर प्रुफिंग के कांट्रैक्टर हैं, उन्हें भी अक्तूबर के पहले सप्ताह में रंजीत ने फोन कर बताया था कि लखीसराय में एक भवन की वाटर प्रुफिंग करनी है.
इसके बाद वे अपने भतीजे शिवपाल के साथ साइट देखने के लिए लखीसराय आये थे. जहां से उन दोनों को अगवा कर कजरा के जंगल ले जाया गया, उनके साथ मारपीट की गयी और फिर फिरौती की रकम मांगी गयी थी, लेकिन अपहर्ताओं की चूक के कारण नारायण वहां से भाग निकले व पीरीबाजार थाना पहुंच गये. पीरीबाजार पुलिस के सहयोग शिवपाल को बरामद किया था. वहीं पीरीबाजार थानाध्यक्ष द्वारा मामले की लीपापोती की गयी थी.
मार्बल व्यवसायी बंधु के अपहरण के बाद पुलिस द्वारा मार्बल व्यवसायी बंधु के मोबाइल पर जिस नंबर से फोन आया था, उसी नंबर से नारायण को भी किया गया था, पुलिस ने नारायण यादव से वह मोबाइल नंबर जान लिया, जिससे उसे फोन आया था, इसके बाद उस फोन का कॉल डिटेल निकाला तो उसे दिल्ली के एक और मार्बल व्यवसायी अयूब का भी नाम सामने आया. इस सूचना पर पुलिस द्वारा अयूब से पूछताछ की गयी तो पता चला कि उसे भी इसी नंबर से फोन कर मार्बल की ठेकेदारी देने की बात कही गयी थी. उसने मना कर दिया था. इसके बाद पटना पुलिस ने नारायण यादव से उसके अपहरण के बाद रखे जाने के ठिकाने का लोकेशन लिया तथा इसी आधार पर कजरा इलाके में प्रवेश किया.
सुरेश व कपिल से पहले अयुब था पहला टारगेट
रंजीत ने पहले मार्बल व्यवसायी अयूब को टारगेट बनाने का प्रयास किया था, लेकिन उसने जब इनकार कर दिया तो मार्बल व्यवसायी बंधु सुरेश व कपिल को प्रलोभन देकर पटना बुलाया था. जहां से उनका अपहरण कर लिया गया था.
