अष्टघट्टी तालाब में पसरी है जलकुंभी.
लोग अन्यत्र घाट की कर रहे तलाश
छठ व्रतियों को होगी परेशानी
लखीसराय : ऐतिहासिक व धार्मिक कारणों से प्रसिद्ध अष्टघट्टी तालाब का पानी बुरी तरह प्रदूषित हो गया है. कभी कमल खिलने के लिए प्रसिद्ध इस तालाब में इन दिनों जलकुंभियों का साम्राज्य है. राजा इंद्रदमण के स्नानागार के रूप में चिह्नित इस तालाब का पानी कभी गंगाजल की तरह पवित्र माना जाता था.
इस तालाब में गंदगी के कारण पनपे मच्छर कई तरह के रोग पैदा करने में लगे हैं. प्रतिवर्ष खास कर छठ पर्व के दौरान इस समस्या की चर्चा होती है. समस्या के बीच ही वार्ड 21, 24 एवं 27 के छठव्रती यहां अर्घ देते आ रहे हैं. तालाब के सुदृढ़ीकरण, घाट निर्माण, सौन्दर्यीकरण पर लाखों रुपये खर्च होते रहे हैं. इसके बावजूद इस तालाब का पानी नाली से भी बदतर दिख रही है. गंदगी के कारण पवित्र तालाब को छोड़ आसपास के लोग भी दूसरे नदी तालाब पर अर्घ देने जा रहे हैं.
गुरुवार को तालाब निरीक्षण के उपरांत डीएम सुनील कुमार ने जल्द ही इसे किसी योजना से जोड़ कर सौन्दर्यीकरण कराये जाने की बात कही है. इधर नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी संतोष कुमार रजक बताते हैं कि विकास निधि का पैसा सभी वार्डो में विभक्त होने से कम पड़ जाता है. छोटी-छोटी योजना से स्थिति में सुधार लाया जा रहा है. शहर के नया बाजार स्थित अष्टघट्टी पोखर के बचाव को लेकर आसपास के लोग काफी चिंतित हैं. वार्ड 24 के पार्षद सह छात्र नेता सुनील कुमार ने अपने विकास योजना की राशि पूरी तरह पोखर के विकास में देने की बात कही है.
तालाब का पानी नाले से भी बदतर
युवा नेता नीरज सिन्हा ने कहा कि जिला प्रशासन या नगर प्रशासन को छोड़ आसपास के लोग स्वयं इसकी सफाई करते आये हैं. पैसा तो काफी इस तालाब के सौंदर्यीकरण पर खर्च हुआ, लेकिन इसका पानी नाली से भी बदतर हो गया है.
लाला कुमार ने कहा कि कभी ऐतिहासिक मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध इस तालाब में सरस्वती माता की हर वर्ष प्रतिमा विसर्जन होती है, लेकिन इसके सफाई पर ध्यान नहीं दिया जाता है.
मन्नु कुमार ने तालाब की स्थिति के लिए सीधे जिला प्रशासन को दोषी ठहराया है. कहा कि जिला प्रशासन ने समविकास योजना से सौंदर्यीकरण के दौरान जल स्त्रोत को समाप्त कर दिया. इसमें प्रतिवर्ष सफाई की जरूरत है.
लक्ष्मी साव बताते हैं कि कभी इसका पानी काफी पवित्र माना जाता था. अब तो इसमें इसके तट पर बने घर का गंदा पानी बहाया जाता है. इस पर रोक लगाया जाना आवश्यक है.
युवा नेता एवं बुद्धिजीवी सुनील कुमार ने पानी को बुरी तरह प्रदूषित बताते हुए अन्यत्र छठ पर्व पर अर्घ देने को ही उचित ठहराया है. इस तालाब का गंदा पानी की स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो आसपास महामारी फैल सकता है.
गुड्डू कुमार ने कहा कि इस तालाब में छठ पर्व का अर्घ पूरी तरह छठ मईया के आर्शीवाद से दिया जा रहा है. जिला प्रशासन या नगर परिषद छठ पर्व पर ही दिखाई देता है.
