सूर्यगढ़ा : आश्विन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है. मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की चांदनी से अमृत बरसता है. वैज्ञानिक भी मानते हैं कि शरद पूर्णिमा की रात स्वास्थ्य व सकारात्मक देनेवाली मानी जाती है, क्योंकि इस दिन चंद्रमा धरती के काफी समीप होता है.
शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणों में खास तरह का लवण व विटामिन आ जाता है. पृथ्वी के पास होने पर इसकी किरणें सीधे जब खाद्य पदार्थों पर पड़ती है तो उसकी क्वालिटी में बढ़ोतरी हो जाती है. मान्यता है कि शरण पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से संपन्न होकर अमृत वर्षा करता है. इसलिए इस रात खीर को खुले आसमान में रखा जाता है. माना जाता है कि इससे रोग मुक्ति होती है और उम्र लंबी होती है.
शनिवार का संयोग
इस वर्ष शरण पूर्णिमा शनिवार को मनायी जायेगी. ऐसा कई वर्षों बाद हो रहा है. इस दिन पूरा चंद्रमा दिखाई देने की वजह से इसे महापूर्णिमा भी कहा जाता है. शरद पूर्णिमा के दिन ही भगवान कृष्ण ने रासलीला की थी, इसलिए इसे रास पूर्णिमा भी कहा जाता है.
इस दिन खीर को चंद्रमा की रोशनी में रखने से उसमें औषधि गुण आ जाता है और वह मन, मस्तिष्क तथा शरीर के लिए अत्यंत उपयोग माना जाता है. मंदिरों में खीर आदि दान करने का विधि विधान है. इस दिन श्री सुक्त, लक्ष्मी, स्तोत्र का पाठ करके हवन करनी चाहिए. इस दिन कोजोगार व्रत करने से माता लक्ष्मी अति प्रसन्न होती है. धन-धान्य मान प्रतिष्ठा आदि सभी कुछ प्रदान करती है.
क्या करें : इस दिन गाय के दूध से खीर बनाकर उसमें घी मिलाकर रात्रि में चंद्रमा की रोशनी में रख दें. सुबह इस खीर का भगवान को भोग लगाये तथा इसे प्रसाद स्वरूप ग्रहण करें.
व्रत की विधि
सुबह में इष्टदेव की पूजा करें
ब्राह्रणों को खीर का भोजन कराकर दान दक्षिणा प्रदान करें
रात को चंद्रमा का अर्घ्य देने के बाद ही भोजन करनी चाहिए
लक्ष्मी प्राप्ति के लिए इस व्रत को विशेष रूप से किया जाता है
