पिकनिक मनाना है तो यहां आइये

पिकनिक मनाना है तो यहां आइयेफोटो संख्या:08-लाली पहाड़ीफोटो संख्या:09-अशोक धामफोटो संख्या:10-श्रंगीऋर्षि धामफोटो संख्या:11-कजरा का टाली झरनाप्रतिनिधि, लखीसरायनया साल के स्वागत में लोग जुटे हैं. जगह-जगह बीते साल को अलविदा व नववर्ष के वेलकम की तैयारी की जा रही है. नये साल के पहले दिन पिकनिक की तैयारी हो रही है. लोग अपने परिवार के अलावे […]

पिकनिक मनाना है तो यहां आइयेफोटो संख्या:08-लाली पहाड़ीफोटो संख्या:09-अशोक धामफोटो संख्या:10-श्रंगीऋर्षि धामफोटो संख्या:11-कजरा का टाली झरनाप्रतिनिधि, लखीसरायनया साल के स्वागत में लोग जुटे हैं. जगह-जगह बीते साल को अलविदा व नववर्ष के वेलकम की तैयारी की जा रही है. नये साल के पहले दिन पिकनिक की तैयारी हो रही है. लोग अपने परिवार के अलावे इष्ट मित्रों के साथ नववर्ष के पहले दिन विभिन्न पिकनिक स्पॉट पर जाने की तैयारी में जुटे हैं. आम तौर पर राजगीर, मुंगेर के भीमबांध, जमालपुर की काली पहाड़ी आदि जगहों के अलावे स्थानीय पिकनिक स्पॉट पर लोग पिकनिक के प्रोग्राम को कार्य रूप दे रहे हैं. लखीसराय के आसपास भी कई ऐसे पिकनिक स्पॉट हैं जहां आप परिवार व अपने इष्ट मित्रों के साथ पिकनिक के लिये जा सकते हैं.लाली पहाड़ी, लखीसरायशहर के वार्ड नंबर 32 व 33 के बीच लाली पहाड़ी वर्षों से लोगों को अपनी ओर आकृष्ट करता रहा है. यहां एेतिहासिक धरोहरों के अलावे कीमती पत्थर पाये गये हैं. पहाड़ी पर मां दुर्गा की अर्द्धनिर्मित मंदिर भी है. यहां प्रत्येक वर्ष पहली जनवरी व मकर संक्रांति के मौके पर काफी संख्या में लोग आते हैं. यहां की गुफा के बारे में कहा जाता है कि पाल वंश के राजा इंद्र दमनेश्वर इसी गुफा के रास्ते अशोक धाम स्थित मंदिर में भगवान भोले शंकर की पूजा करने जाते थे.अशोक धामलखीसराय जिले की पहचान बन चुका रजौना चौकी स्थित अशोकधाम मंदिर में विशालकाय शिवलिंग 07 अप्रैल 1977 को जमीन के अंदर से खुदाई कर निकाला गया. आज यहां इंद्रदमनेश्वर महादेव ट्रस्ट की देखरेख में पांच एकड़ परिसर में विशाल मंदिर का निर्माण किया गया है. श्रद्धालुओं की सुविधा व विश्राम के लिये यहां व्यवस्था की गयी है. लखीसराय-बड़हिया एनएच 80 में शहर से तीन किलोमीटर दूर व एनएच से डेढ़ किलोमीटर अंदर इस धार्मिक स्थल पर यूं तो हर दिन श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है, लेकिन सावन माह के अलावे प्रत्येक सोमवारी को श्रद्धालुओं की खास भीड़ होती है. पहली जनवरी को लोग विशेष तौर पर यहां आकर पूजा करते हैं और परिवार व इस्ट मित्रों के साथ पिकनिक का आनंद लेते हैं. श्रृंगी ऋर्षि धामजिला मुख्यालय से लगभग आठ किलोमीटर पूरब पर्वत श्रृंखलाओं के बीच प्रकृति की गोद में बसा रामायणकालीन महत्व वाला श्रंगीऋर्षि धाम में भगवान श्री राम के जन्म के पूर्व का प्राचीन शिव मंदिर विराजमान है. मान्यताओं के मुताबिक अयोध्या के राजा दशरथ पुत्र प्राप्ति की इच्छा से ऋर्षि श्रृंगि के आश्रम आये थे. यहां उन्होंने पुत्रेष्ठी यज्ञ किया और भगवान राम सहित चारों भाइयों का मुंडन संस्कार भी यहीं किया गया. यहां गरम पानी का एक सुंदरकुंड है. अपने अनोखे प्राकृतिक सौंदर्य व गरम जल के झरना के कारण यह आज भी पर्यटकों को आकृर्षित करता है. कजरा, लखीसराय या सूर्यगढ़ा से सड़क मार्ग से यहां जाया जा सकता है. पहली जनवरी को पिकनिक के लिये काफी संख्या में लोग यहां आते हैं. कजरा का टाली झरना कजरा से लगभग तीन किलोमीटर दूर पर्वत श्रृंखलाओं की गोद में बसा टाली झरना में गरम पानी का जलाशय है. मान्यता है कि झरना के पानी में औषधीय गुण है. इसके पानी के सेवन से चर्म रोग के अलावे कई प्रकार की बीमारियां दूर होती हैं. पहली जनवरी व अन्य मौके पर लोग यहां पिकनिक के लिये आते हैं. हालांकि कजरा से टाली झरना तक आने के लिये लोगों के कच्चे-पक्के दुर्गम पथ होकर आना पड़ता है. लेकिन यहां पहुंचकर प्रकृति की अनुपम छटा से उनकी सारी थकान मिट जाती है. बड़हिया के मां त्रिपुर बाला सुंदरी मंदिर में लगती है श्रद्धालुओं की भीड़ बड़हिया स्थित मां बाला त्रिपुर सुंदरी मंदिर आध्यात्मिक दृष्टिकोण से एक सिद्ध मंगलपीठ के रूप में प्रसिद्ध है. पहली जनवरी को काफी संख्या में लोग यहां पूजा के लिये आते हैं व नववर्ष के मंगलमय होने की कामना करते हैं. मुंगेर का भीमबांध प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर जिले के समीपवर्ती मुंगेर जिले के खड़गपुर में स्थित भीमबांध 45 किलोमीटर दूर है. भीमबांध नववर्ष पर परिवार के साथ सेलिब्रेट करने के लिये एक बेहतर पिकनिक स्पॉट है. शहर के शोर-गुल से दूर पेड़-पौधे के बीच भीमबांध स्पॉट गरम पानी के झरने के लिये मशहूर है. ठंड के मौसम में काफी संख्या में लोग यहां आते हैं. लखीसराय से सड़क के रास्ते यहां जाया जा सकता है.

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