शीत लहर ने बढ़ायी ठंड, लोग हलकान

शीत लहर ने बढ़ायी ठंड, लोग हलकान तापमान चार डिग्री के आसपास पहुंचने की संभावना मौसम वैज्ञानिकों की माने तो अगले दो-तीन दिनों में न्यूनतम तापमान में और गिरावट आयेगी तथा हवा का बढ़ता वेग ठंड के प्रकोप को और अधिक बढ़ायेगा. 19 दिसंबर तक आकाश में बादल छाये रहने की संभावना है और तापमान […]

शीत लहर ने बढ़ायी ठंड, लोग हलकान तापमान चार डिग्री के आसपास पहुंचने की संभावना मौसम वैज्ञानिकों की माने तो अगले दो-तीन दिनों में न्यूनतम तापमान में और गिरावट आयेगी तथा हवा का बढ़ता वेग ठंड के प्रकोप को और अधिक बढ़ायेगा. 19 दिसंबर तक आकाश में बादल छाये रहने की संभावना है और तापमान चार डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना हैहवा का वेग हुआ 14 किलोमीटर प्रति घंटा प्रतिनिधि, जमुई ठंड के बढ़ते प्रकोप की वजह से जहां लोग अपने-अपने घरों में कंबल और रजाई में दुबकने को विवश हो रहे हैं, वहीं शाम ढलते ही बाजार में लोगों की आवाजाही भी कम हो रही है. मौसम वैज्ञानिकों की माने तो अगले दो-तीन दिनों में न्यूनतम तापमान में और गिरावट आयेगी तथा हवा का बढ़ता वेग ठंड के प्रकोप को और अधिक बढ़ायेगा. 19 दिसंबर तक आकाश में बादल छाये रहने की संभावना है और तापमान चार डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना है. 20 दिसंबर को न्यूनतम तापमान 8 डिग्री सेल्सियस व अधिकतम तापमान 20 डिग्री, 21 व 22 दिसंबर को न्यूनतम तापमान 10 डिग्री और अधिकतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है. वहीं 23 दिसंबर को न्यूनतम तापमान 9 डिग्री और अधिकतम तापमान 23 डिग्री तथा 24 दिसंबर को न्यूनतम तापमान पुन: 4 डिग्री और अधिकतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है. 23 एवं 24 दिसंबर को आकाश बिल्कुल साफ रहेगा. शीत लहर का प्रकोप तेज होने से रात के तापमान में गिरावट आयेगी. ठंड ने पूरे क्षेत्र को अपनी आगोश में ले लिया है और लोग विवश होकर अपने-अपने घरों में दुबकने को मजबूर हो रहे हैं. फसलों को पहुंच सकता है नुकसान ठंड के बढ़ते प्रकोप की वजह से आलू और सरसों के फसल को नुकसान पहुंचने की संभावना है. कोहरा और शीत लहर की वजह से जहां आलू के फसल में झुलसा रोग हो सकता है, वहीं सरसों में माहु कीट की वजह से फसल खराब हो सकती है. कैसे करे फसलों का बचाव आलू के फसल को झुलसा रोग से बचाने के लिए किसान एक से डेढ़ किलो डाईफेन एम45 सक्रिय तत्व प्रति हेक्टेयर के हिसाब से पानी में घोल कर छिड़काव करें. जबकि सरसों को माहु रोग से बचाने के लिए डेढ़ से दो लीटर साईफर मैट्रिन का छिड़काव प्रति हेक्टेयर के हिसाब से करें.पशुओं को भी विशेष बचाव की जरूरत कृषि वैज्ञानिक प्रमोद कुमार बताते हैं कि बढ़ते ठंड से किसानों के अपने फसल को बचाने के साथ-साथ अपने पशुओं पर भी विषेष ध्यान देने की आवश्यकता होगी.जो भी पशुपालक बढ़ते ठंड के बाबत पशुओं के रहने-सहने के प्रति सावधानी नहीं बरतते हैं उन्हें नुकसान भी उठाना पड़ सकता है. पशुओं को जूट के बोरे से बने झूल से ढ़ंक कर रखें और उनके रहने के स्थान को चारों ओर से प्लास्टिक या बोरा से घेर दें.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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