जन्मभूमि पर लगे कलंक को मिटाने 2600 साल बाद वापस आये भगवान ओमप्रकाश सिकंदरा . चाहे इंसान हो या भगवान इस धरा पर जन्म लेने वाले हर व्यक्ति के मन में अपनी जन्मभूमि के प्रति अगाध आस्था व श्रद्धा होती है. यह बात रविवार को उस समय एक बार फिर से सार्थक साबित हुई,जब जन्मभूमि के प्रेम से वशीभूत होकर भगवान महावीर स्वामी को अपनी जन्मभूमि को कलंक के टीमे से बचाने के लिए 2600 साल बाद एक फिर से आना पड़ गया. यह तो सर्वविदित है कि सिकंदरा की शस्य श्यामला पावन धरती पर भगवान महावीर की असीम कृपा रही है और आग से तकरीबन 2615 वर्ष पहले तीर्थंकर महावीर ने सात पहाड़ों से आच्छादित इस दुर्गम स्थान पर जन्म लेकर इस धरती को पवित्र कर दिया था. वहीं 27 नवंबर की स्याह रात में जब स्वार्थ के वशीभूत कुछ लोगों ने भगवान महावीर की 2600 साल पुरानी प्रतिमा की जन्मस्थान से चोरी कर इस पवित्र भूमि को अपमानित व कलंकित करने का कुरिसत प्रयास किया तो एक बार फिर से भगवान महावीर ने अपनी वापसी को कलंकित होने से बचा लिया. इस घटना को अपनी जन्मस्थली को कलंकित होने से बचा लिया. इस घटना को अपनी जन्मस्थली को कलंकित होने से बचाने के लिए भगवान महावीर का पुर्नजन्म भी का जाय तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी. भगवान महावीर की प्रतिमा चोरी की घटना के बाद से ही सिकंदरा क्षेत्र का हर व्यक्ति अपने आप में शर्मिंदगी महसूस कर रहा था और पूरे देश विदेश में भगवान महावीर की जन्मस्थली के रूप विख्यात सिकंदरा के लोगों के प्रतिहीन भावना पनपने लगी. ऐसे एस धरती पर जन्म लेने वाला हर व्यक्ति दुखी था और इस दुख को दूर करने के लिए और अपनी जन्मभूमि को अपमानित व कलंकित होने से बचाने के लिए कभी इसी मिट्टी में जन्म लेने वाले एक लाल को सामने आना पड़ा और भगवान महावीर ने 2600 साल बाद एक बार फिर से इस धरा पर वापसी का अपने जन्मस्थान को पवित्र कर दिया है.
जन्मभूमि पर लगे कलंक को मिटाने 2600 साल बाद वापस आये भगवान
जन्मभूमि पर लगे कलंक को मिटाने 2600 साल बाद वापस आये भगवान ओमप्रकाश सिकंदरा . चाहे इंसान हो या भगवान इस धरा पर जन्म लेने वाले हर व्यक्ति के मन में अपनी जन्मभूमि के प्रति अगाध आस्था व श्रद्धा होती है. यह बात रविवार को उस समय एक बार फिर से सार्थक साबित हुई,जब जन्मभूमि […]
