ताजपुर पंचायत में बदलाव तो हुआ लेकिन प्रयास अभी बाकी है पानी की कमी के कारण लोगों की जिंदगी सूख रहीचारे के अभाव में किसानों के लिए मवेशी पालन भी हो गया है मुशकिलमहादलित टोला में एक भी व्यक्ति को नहीं मिला राशन कार्ड रोजगार के अभाव में लोग करते है पलायनपंचायत फैक्टपंचायत का नाम-ताजपुरप्रखंड-सूर्यगढ़ाआबादी-लगभग 11 हजारमतदाता-7199गांव-देवघरा,देवघरा चंद्रटोला,भिड़हा,रसुलपूर,सलारपुरफोटो संख्या:01-मुखिया प्रेमा कुमारीफोटो संख्या:02-मुखिया प्रत्याशी प्रवीण कुमार पंकजफोटो संख्या:03-भासीे यादवफोटो संख्या:04-कपिलदेव दासफोटो संख्या:05-लक्षमण रजकफोटो संख्या:06-संजय पंडितफोटो संख्या:07-सत्तन रजकफोटो संख्या:08-शनिचरी देवीफोटो संख्या:09-शैला देवीफोटो संख्या:10-मुकेश कुमारफोटो संख्या:11-सिकंदर महतोंफोटो संख्या:12-भिड़हा गांव जाने वाली जर्जर सड़कप्रतिनिधि, लखीसरायपंचायती राज के पांच साल गुजरने वाला है. इसके बाद भी मुंगेर जिला की सीमा पर स्थित सूर्यगढ़ा प्रखंड का ताजपुर पंचायत के ग्रामीणों को समस्याओं से निजात नहीं मिली. भूमि की अनुपलब्धता की वजह से पंचायत सरकार भवन यानि पंचायत सचिवालय नहीं बन पाया. पंचायत भवन जर्जर होने की वजह से कोई अन्य सभा भवन नहीं है. पंचायत में पेयजल, सिंचाई, जलजमाव आदि की समस्या आज भी मुंह बाये खड़ी है. पंचायत क्षेत्र के किसानों को सिंचाई सुविधा का लाभ नहीं मिल रहा है. पानी की कमी के कारण लोगों की जिंदगी सूख रही है. नहर सफेद हाथी साबित हुआ. पंचायत में एक भी राजकीय नलकूप नहीं होने की बजह से सिंचाई के अभाव में खेती दम तोड़ रही है. फसल उत्पादन का ग्राफ नीचे गिर रहा है. खेती घाटे का सौदा बनकर रह गया है. मवेशी पालन भी चारे के अभाव में प्रभावित हुआ है. पंचायत में जलजमाव की समस्या अभी भी बरकरार है. सैकड़ों एकड़ खेत में जलजमाव का स्थिति बनी रहती है. पंचायत में एक भी जलापूर्ति केंद्र नहीं है. यहां की अधिकतर आबादी पेयजल पेयजल की समस्या से जुझ रहे हैं. जर्जर विद्युत तार को बदला नहीं गया. कभी भी हादसा हो सकता है. वर्ष 2015-16 में पंचायत को खुले में शौच से मुक्त बनाने की योजना है. इसके लिए युद्ध स्तर पर शौचालय का निर्माण किया जा रहा है. बावजूद इसके अभी भी शौचालय की कमी के कारण ग्रामीण पथों के किनारे मानव मल का ढेर लगा रहता है. भिड़हा गांव में नालियों की कमी है. जहां कहीं नाली है भी तो उसपर ढक्कन नहीं है. पंचायत में बीते साढ़े चार साल के दौरान कई योजनाओं के धरातल पर उतरने की वजह से बदलाव दिखने लगा है. लेकिन लोगों के मुताबिक पिछले पंचायत चुनाव के बाद उन्होंने अपने मन में विकास का जो खाका तैयार किया था, उसमें प्रयास अभी बाकी है. मुखिया प्रेमा कुमारी के मुताबिक इन साढ़े चार साल में कुल 71 चापाकल गाड़ा गया. इसके अलावे भिड़हा में तीन, देवघरा में तीन व देवघरा चंद्र टोला में आठ नाला सहित पीसीसी सड़क का निर्माण हुआ. इसें अलावे रसुलपूर में दो व सलारपुर में चार पीसीसी सड़क का निर्माण हुआ. पंचायत में दस गलियों का ईट खरंजाकरण किया गया. दो आंगनबाड़ी केंद्र भवन, तीन चबूतरा नदी घाटों पर तीन सीढियों का निर्माण कराया गया. पीएचइडी के द्वारा 50 व मनरेगा के तहत 16 शौचालयों का निर्माण कराया गया. 10 बीपीएल परिवारों की जमीन पर मिट्टी भराई का कार्य किया गया. 29 यूनिट पौधारोपन का कार्य हुआ जिसमें 13 यूनिट पौधे जीवित बचे हैं. पारिवारिक सूची में शामिल 2201 परिवारों में से 12 सौ परिवारों को राशन कार्ड दिया गया. लगभग आठ सौ लोगों को पेंशन योजना का लाभ दिया जा रहा है. पंचायत में 2359 जॉब कार्डधारी मजदूर हैं. क्या कहते हैं लोगमुखिया प्रत्याशी प्रवीण कुमार पंकज के मुताबिक पंचायत में विकास तो हुआ लेकिन पंचायत के द्वारा नहीं. पंचायत के द्वारा क्रियान्वित योजनाओं में गुणवत्ता की कमी है. पंचायत भवन को ऑन लाइन देखने के लिए सरकार ने कंप्यूटर तक की व्यवस्था कर रखी है. जबकि मुखिया के आवास पर काम-काज होता है. मजदूरों का जॉब कार्ड भी मुखिया के पास गिरवी है. देवघरा चंद्रटोला के सत्तन रजक के मुताबिक गांव में काफी विकास हुआ. सड़कों का जाल बिछ गया है. नालियों व चापाकल की व्यवस्था की गयी है. भासो पासवान के मुताबिक गांव में मिट्टी भराई का काम हुआ. सड़क, शौचालय, नाला आदि का निर्माण किया गया. मिल्की गांव के लक्ष्मण रजक के मुताबिक मिल्की गांव में एक भी व्यक्ति को राशन कार्ड नहीं मिला. विकास का कार्य हुआ है. सलारपुर के संजय पंडित के मुताबिक गांव में सामूहिक शौचालय का अभाव है. मुखिया जी के गांव के समीप नदी घाट पर दो सीढ़ियों का निर्माण किया गया लेकिन सलारपुर में एक भी सीढी का निर्माण नहीं हुआ. देवघरा के कपिलदेव मंडल के मुताबिक बीते साढ़े चार साल में पंचायत में विकास के कई काम हुए. सड़क व नाला तो बना लेकिन सामुदायिक भवन का निर्माण नहीं हो पाया. देवघरा चंद्रटोला की शनिचरी देवी के मुताबिक गांव में विकास हुआ. गांव में नाला निर्माण पीसीसी सड़क का निर्माण किया गया. इसी गांव की शैला देवी के मुताबिक गलियों में बारिश के दिनों में कीचड़ जमा हो जाता है. गांव में चापाकल की भी कमी है. मुकेश कुमार के मुताबिक पंचायत में विकास का कार्य किया गया. सफीपुर भिड़हा के सिकंदर महतो के मुताबिक यह गांव उपेक्षित रहा. गलियों का पक्कीकरण नहीं हुआ. चापाकल की भी कमी है. शौचालय नहीं होने की वजह से आधी आबादी खुले में शौच जाने को मजबूर है. क्या कहती हैं मुखियापंचायत की मुखिया प्रेमा कुमारी के मुताबिक पंचायती राज में गांव में पीसीसी सड़क, इंदिरा आवास, चापाकल, शौचालय, मिट्टी भराई, चबूतरा, नया पेंशन आदि करोड़ों का विभिन्न जनोपयोगी योजनाओं को धरातल पर उतारा गया. इसके अलावे पौधारोपण किया गया. इंदिरा आवास के लिए अनुसूचित जाति के जरूरतमंद 196 बीपीएल परिवार व अल्पसंख्यक के 104 परिवार का नाम प्रस्तावित है. स्थानीय लोगों के असहयोगात्मक रवैये की वजह से मिल्की व भिड़हा में पथ निर्माण नहीं हो सका.
ताजपुर पंचायत में बदलाव तो हुआ लेकिन प्रयास अभी बाकी है
ताजपुर पंचायत में बदलाव तो हुआ लेकिन प्रयास अभी बाकी है पानी की कमी के कारण लोगों की जिंदगी सूख रहीचारे के अभाव में किसानों के लिए मवेशी पालन भी हो गया है मुशकिलमहादलित टोला में एक भी व्यक्ति को नहीं मिला राशन कार्ड रोजगार के अभाव में लोग करते है पलायनपंचायत फैक्टपंचायत का नाम-ताजपुरप्रखंड-सूर्यगढ़ाआबादी-लगभग […]
