सांप्रदायिक सद्भाव की मिशाल पेश कर रहे उरैन गांव के लोग कजरा. कजरा थाना क्षेत्र का उरैन गांव के लोग आपसी सहयोग के द्वारा सांप्रदायिक सद्भाव की मिशाल पेश कर रहे हैं. हिंदुओं का त्योहार दशहरा हो या मुसलमान भाइयों का त्योहार मुहर्रम, यहां के लोग सारे त्योहार को मिल-जुलकर मनाते हैं. उरैन निवासी शशिभूषण यादव, शीतल राम, इनायतउद्दीन उर्फ नन्हु मियां, मो असलम, मो शेरु आदि ने बताया कि यहां लगभग सावा सौ मुसलिम परिवार रहते हैं. लगभग साढे तीन सौ हिंदू धर्मावलंबी परिवार भी यहां हैं. दोनों समुदाय के लोग एक-दूसरे के त्योहार में बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाते हैं और सहयोग करते हैं. जहां आज दुनिया में लोगों को जाति और मजहब के नाम पर बांटने की कोशिश हो रही है, यहां के लोगों का आपसी प्रेम आपसी भाईचारे का संदेश देता प्रतीत होता है.मुहर्रम का जुलूस निकलाचानन/कजरा. शनिवार को प्रखंड के भंडार, घोसीकुंडी व इटौन गांव में मुहर्रम का जुलूस निकाला गया. इस मौके पर युवकों द्वारा लाठी, भाला, तलवार आदि से हैरतअंगेज कलाबाजी का प्रदर्शन किया गया. ताजिया को कंधा देने के लिये लोगों में प्रतिस्पर्धा लगी रही. सभी गांव के ताजिया का मननपुर बाजार में मिलन कराया गया. इधर कजरा प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र के उरैन में मुहर्रम का विसर्जन जुलूस निकाला गया. खलीफा रियाज खान के नेतृत्व में निकला जुलूस में इमामबाड़ा से ही युवक अस्त्र-शस्त्र खेलते नजर आये. ढोल बाजे के साथ घंटों लोगों ने कलाबाजी का प्रदर्शन किया. जुलूस में हिंदू भाइयों ने भी बढ़-चढ़कर भागीदारी निभायी. देर रात करबला में ताजिया का पहलाम किया गया.
सांप्रदायिक सद्भाव की मिशाल पेश कर रहे उरैन गांव के लोग
सांप्रदायिक सद्भाव की मिशाल पेश कर रहे उरैन गांव के लोग कजरा. कजरा थाना क्षेत्र का उरैन गांव के लोग आपसी सहयोग के द्वारा सांप्रदायिक सद्भाव की मिशाल पेश कर रहे हैं. हिंदुओं का त्योहार दशहरा हो या मुसलमान भाइयों का त्योहार मुहर्रम, यहां के लोग सारे त्योहार को मिल-जुलकर मनाते हैं. उरैन निवासी शशिभूषण […]
