लखीसराय : सोमवार की रात मुहर्रम पर्व को लेकर बड़ी दरगाह के मुसलिम समुदाय के लोग अपने पारंपरिक खेल लाठी का करतब दिखाते हुए पांचवी को मिट्टी लाने इंगलिश मुहल्ला गये. मो मुन्ना ने बताया कि आज से महर्रम की शुरूआत हो गयी है. छठी के दिन मसजिद में नवाज अदा कर पाकड़ खेलने की तैयारी की जायेगी जो दसवीं तक चलेगी.
दसवीं को ताजिया निकाला जयेगा. हजरत इमाम हुसैन ने करवला में अपनी जो कुरबानी पेश की उसका संदेश युगों तक मानव को प्रेरणा देता रहेगा. इमाम हुसैन व उनके सथियों के द्वारा पेश की गयी सहादत की याद में मुहर्रम मनाया जाता है. हजरत इमाम हुसैन ने अपने नाना जान हजरत मो साहेब के सिद्धांतों और उनके आदर्शो की हिफाजत अपनी अजीम सहादत देकर की. वह जुर्म के आगे नहीं झुके.
एक तरफ हजारों सिपाहसलार दूसरी तरफ इमाम हुसैन के 72 जानिसार. करबला की सरजमी पर हुसैन ने अपने खून से इस्लाम व इनसानियत के सिद्धांतों की हिफाजत की. कहते हैं कि जब हुसैन को यजीद के लश्करों ने शहीद किया वे नमाज अदा कर रहे थे. मौलानगर कोणीपार के खलीफा कमरूद्वीन अंसारी कहते हैं कि इमाम हुसैन की कुरबानी और शहादत से सीख लेकर लोग आदर्शो के लिए जीना सीखें. आदर्शों की हिफाजत करना सीखें और अपने अंदर त्याग बलिदान का जज्बा पैदा करें. यह त्योहार सच्चाई के राह पर चलने का संदेश देता है.
