गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर रविवार संध्या किशनगंज जिले के ठाकुरगंज स्थित जगन्नाथ मंदिर परिसर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) द्वारा 'गुरु दक्षिणा उत्सव' का आयोजन अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ किया गया. कार्यक्रम में नगर एवं आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों ने भगवा ध्वज को परम गुरु मानकर नमन किया तथा राष्ट्र, समाज और संस्कृति की रक्षा के लिए समर्पित रहने का संकल्प लिया.
भगवा ध्वज त्याग, तपस्या और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक
कार्यक्रम का शुभारंभ ध्वज प्रणाम एवं प्रार्थना के साथ हुआ, जिसके पश्चात स्वयंसेवकों ने कतारबद्ध होकर श्रद्धापूर्वक गुरु दक्षिणा अर्पित की.
समारोह को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में किसी व्यक्ति विशेष को गुरु नहीं माना जाता, बल्कि भगवा ध्वज को ही सर्वोच्च गुरु का स्थान प्राप्त है. भगवा ध्वज भारतीय संस्कृति, त्याग, तपस्या, सेवा, अनुशासन और समरसता का शाश्वत प्रतीक है, जो सदियों से समाज को निस्वार्थ भाव से राष्ट्रहित में कार्य करने की प्रेरणा देता आया है.
केवल आर्थिक सहयोग नहीं, आत्मसमर्पण का संकल्प है गुरु दक्षिणा
वक्ताओं ने गुरु दक्षिणा के वास्तविक भाव को स्पष्ट करते हुए कहा:
मुख्य विचार: "गुरु दक्षिणा उत्सव केवल आर्थिक सहयोग का माध्यम नहीं है, बल्कि यह आत्मसमर्पण, कर्तव्यबोध और राष्ट्र के प्रति समर्पित जीवन जीने का संकल्प है. स्वयंसेवकों द्वारा अर्पित सहयोग से संगठन समाज जागरण, शिक्षा, संस्कार और सेवा कार्यों को निरंतर आगे बढ़ाता है."
संबोधन में वर्तमान समय में सामाजिक एकता, पारिवारिक मूल्यों (कुटुंब प्रबोधन) और सांस्कृतिक संरक्षण की आवश्यकता पर भी बल दिया गया.
भारत माता की जय के उद्घोष से गूंजा परिसर
कार्यक्रम का समापन 'भारत माता की जय' और 'वंदे मातरम्' के जोशीले जयघोष के साथ हुआ.
समारोह में उपस्थित प्रमुख पदाधिकारी व स्वयंसेवक:
इस अवसर पर संघ के विभाग कार्यकारिणी सदस्य नागराज नखत, जिला कार्यवाह हरदेव नारायण सिंह, नगर संघचालक विनोद यादव, जिला बौद्धिक प्रमुख प्रो. दिलीप यादव, जिला कुटुंब प्रबोधन प्रमुख उमेश ठाकुर, नगर संपर्क प्रमुख देवाशीष, नगर सह कार्यवाह विजय साह सहित भारी संख्या में स्वयंसेवक उपस्थित रहे.
