ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट
Toto E Rikshaw: किशनगंज जिले के ठाकुरगंज नगर पंचायत क्षेत्र में इन दिनों यातायात व्यवस्था पूरी तरह से बेपटरी हो चुकी है. नगर की मुख्य सड़कों से लेकर ठाकुरगंज रेलवे स्टेशन परिसर तक अवैध और अनियंत्रित टोटो (ई-रिक्शा) चालकों के कारण दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है. मुख्य बाजार, अस्पताल रोड, बस स्टैंड, दल्लेगांव चौक और भातढाला चौक जैसे व्यस्ततम इलाकों में टोटो चालकों द्वारा बीच सड़क पर ही मनमाने तरीके से वाहन रोककर सवारी बिठाने और उतारने का खेल जारी है. स्थानीय प्रशासन और नगर पंचायत की उदासीनता के कारण कई व्यस्त सड़कें अब अस्थायी टोटो स्टैंड में तब्दील हो चुकी हैं, जिससे राहगीरों और दुकानदारों का जीना मुहाल हो गया है.
टोटो चालकों की मनमानी से मुख्य चौक-चौराहे हुए जाम
नगर में गहराते इस ट्रेफिक संकट की मुख्य वजहें और स्थानीय लोगों की परेशानियां निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से सामने आई हैं:
- नियम-कानून ताक पर: ठाकुरगंज नगर में टोटो के रूट निर्धारण और संचालन को लेकर नगर पंचायत के पास कोई स्पष्ट नियमावली या रूट चार्ट नहीं है. नतीजा यह है कि चालक अपनी मर्जी से किसी भी सड़क पर गाड़ी दौड़ाते हैं और कहीं भी ब्रेक मार देते हैं.
- पैदल चलना भी दूभर: प्रमुख चौराहों पर सुबह से शाम तक टोटो का रेला लगा रहता है. इस वजह से छोटी-मोटी दुर्घटनाएं आम बात हो गई हैं और बुजुर्गों, महिलाओं व बच्चों को पैदल सड़क पार करने में भी भारी भय और कठिनाई का सामना करना पड़ता है.
रेलवे स्टेशन पर महंगी पार्किंग दर बनी जी का जंजाल, व्यवस्था ध्वस्त
स्टेशन परिसर की कड़वी हकीकत: इस अव्यवस्था का सबसे भयावह रूप ठाकुरगंज रेलवे स्टेशन परिसर में देखने को मिल रहा है. जानकारों के मुताबिक, पूर्व में रेलवे प्रशासन द्वारा स्टेशन परिसर में बकायदा पार्किंग व्यवस्था संचालित की जाती थी, जहां टोटो चालकों से एक तय शुल्क लेकर उन्हें निर्धारित कतार में खड़ा कराया जाता था. लेकिन हाल ही में रेलवे द्वारा पार्किंग के नवीनीकरण (रिन्यूअल) के दौरान ठेके की आरक्षित दर और पार्किंग शुल्क को काफी बढ़ा दिया गया. दरें इतनी अधिक थीं कि घाटे के डर से कोई भी स्थानीय ठेकेदार टेंडर प्रक्रिया में शामिल होने आगे नहीं आया. परिणामस्वरूप, पार्किंग का ठेका ठप हो गया और स्टेशन का पूरा परिसर लावारिस टोटो स्टैंड बन गया.
ट्रेन आते ही यात्रियों को घेर लेते हैं दर्जनों टोटो चालक
यात्रियों की सुरक्षा पर खतरा:
वर्तमान में स्थिति यह है कि जैसे ही स्टेशन पर किसी ट्रेन का आगमन होता है, दर्जनों टोटो चालक यात्रियों को लपकने के लिए स्टेशन के मुख्य प्रवेश द्वार (एंट्री गेट) के भीतर तक गाड़ियां घुसा देते हैं. स्टेशन से बाहर निकलते ही यात्री चारों तरफ से टोटो की भीड़ से घिर जाते हैं. सुव्यवस्थित पार्किंग न होने से यात्रियों को अपनी ट्रेन पकड़ने या स्टेशन से बाहर निकलकर मुख्य सड़क तक आने में भारी फजीहत झेलनी पड़ती है.
संयुक्त प्रशासनिक पहल और दरों की समीक्षा से ही निकलेगा समाधान
स्थायी निदान की मांग:
ठाकुरगंज के प्रबुद्ध नागरिकों और व्यापारियों का कहना है कि यह समस्या अब किसी एक विभाग के वश की नहीं रही. इसके लिए रेलवे प्रशासन, स्थानीय अनुमंडल प्रशासन और नगर पंचायत को संयुक्त रूप से एक साझा बैठक कर बीच का रास्ता निकालना होगा:
- पार्टिंग दरों की समीक्षा: रेलवे को चाहिए कि वह व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाते हुए पार्किंग शुल्क की दरों को कम करे, ताकि ठेका प्रक्रिया सफल हो सके और वाहन अनुशासित दायरे में खड़े हों.
- नो-पार्किंग ज़ोन और स्टैंड: नगर पंचायत मुख्य बाजारों और स्टेशन रोड को ‘नो-पार्किंग ज़ोन’ घोषित करे और टोटो के लिए अलग से टोटो स्टैंड चिन्हित करे.
स्थानीय नगरवासियों ने प्रशासन को आगाह किया है कि यदि समय रहते टोटो की संख्या को नियंत्रित करने और स्टेशन पार्किंग को दोबारा बहाल करने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में ठाकुरगंज की पूरी यातायात व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो जाएगी.
