Kishanganj, सड़कों पर थ्रेसरिंग से आवाजाही में परेशानी
सड़कों पर थ्रेसरिंग से आवाजाही में परेशानी
पौआखाली, किशनगंज से रणविजय की रिपोर्ट,
इन दिनों ग्रामीण इलाकों में मक्का की फसल की कटाई और थ्रेसिंग मतलब दाने निकालने का काम जोरों पर है लेकिन, किसानों द्वारा अपनाई जा रही एक गलत कार्यप्रणाली अब आम जनमानस के लिए मुसीबत का सबब बन गई है. किसान मक्का थ्रेसिंग का कार्य किसी सुरक्षित या खुले मैदान में करने के बजाय मुख्य ग्रामीण सड़कों पर कर रहे हैं. सड़क के एक साइड में थ्रेसर मशीनें खड़ी कर सड़क की दिशा में ही घास फूस, धूलकण आदि निकालने से आवागमन में परेशानी बढ़ने लगी है. सड़क का एक बड़ा हिस्सा थ्रेसर मशीन और मक्का के ढेरों से घिरा रहता है, जिससे दोपहिया और चारपहिया वाहनों को निकलने मशक्कत करनी पड़ती है. ऐसा ही नजारा ठाकुरगंज प्रखंड में गंभीरगढ़ एनएच 327 ई मार्ग से दुराघाटी की ओर जाने वाली ग्रामीण सड़क पर देखने को मिली है, जहां तातपौवा पंचायत सरकार भवन के ठीक बगल में सड़क पर ही थ्रेसिंग किया जा रहा था. गौरतलब है कि सड़क पर थ्रेसिंग से उत्पन्न होने वाली परेशानियां केवल यातायात तक ही सीमित नहीं हैं बल्कि, आंखों और सांसों की समस्या भी खड़ी कर रही है. मशीन से उड़ने वाली बारीक डस्ट और मक्का के कण हवा में मिलकर राहगीरों की आंखों में जा रहे हैं, जिससे बाइक सवारों को भारी असुविधा हो रही है. इसके अलावे सड़क पर बिखरे डंठल, पत्तियां और मक्का के अवशेषों के कारण ब्रेक मारने पर वाहन फिसल रहे हैं. खुले में थ्रेसिंग से आसपास के घरों में भी धूल की परत जम रही है, जो बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है.स्थानीय राहगीरों का कहना है कि सड़क सार्वजनिक संपत्ति है, न कि खलिहान. सड़क पर काम होने से न केवल समय की बर्बादी होती है, बल्कि जान-माल का खतरा भी बना रहता है. पैदल चलने वाले लोगों के लिए धूल के गुबार के बीच से गुजरना दूभर हो गया है.