ठाकुरगंज: सिर पर धूप, हाथ में उम्मीद और दफ्तरों के चक्कर; बासगीत पर्चे के इंतजार में तातपौआ के तीन दर्जन भूमिहीन परिवार

किशनगंज जिले में भूमिहीन गरीब परिवार वर्षों से बासगीत पर्चे के इंतजार में सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं. प्रशासनिक उपेक्षा के चलते उनका अपने घर का सपना अधूरा है. मजदूरी का नुकसान और किराए का बोझ झेलकर भी उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिल रहा है.

किशनगंज जिले के सीमावर्ती ठाकुरगंजClick to open side panel for more information प्रखंड क्षेत्र में भूमिहीन और गरीब परिवारों के अपने घर का सपना प्रशासनिक उपेक्षा और लालफीताशाही की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है. सुखानी थाना क्षेत्र अंतर्गत तातपौआ ग्राम पंचायत के वार्ड संख्या-07 सहित बिलायतिवारी, हराबाना और डिगीबस्ती के तीन दर्जन से अधिक भूमिहीन परिवार वर्षों से बासगीत पर्चा (आवासीय भूमि पट्टा) मिलने की आस में प्रखंड और अंचल कार्यालय की चौखट नाप रहे हैं. भीषण धूप और गर्मी के बीच अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ दफ्तरों के चक्कर काट रहे इन परिवारों को हर बार केवल 'आश्वासन' देकर लौटा दिया जाता है.

मजदूरी का नुकसान और किराए का बोझ, फिर भी खाली हाथ

दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर गरीब परिवारों की व्यथा:

  • दैनिक मजदूरी का नुकसान: दूर-दराज के गांवों से प्रखंड कार्यालय पहुंचने वाले इन भूमिहीन परिवारों की उस दिन की मजदूरी मारी जाती है, जिससे इनके घर का चूल्हा जलना मुश्किल हो जाता है.
  • आने-जाने का आर्थिक बोझ: ऑटो व टोटो का किराया लगाकर गरीब परिवार उम्मीद के साथ पहुंचते हैं, लेकिन अधिकारियों की बेरुखी उनकी उम्मीदों पर पानी फेर देती है.
  • प्रभावित गांव: तातपौआ पंचायत का वार्ड नंबर 07, बिलायतिवारी, हराबाना और डिगीबस्ती के लगभग 36 से ज्यादा परिवार इस समस्या से सीधे प्रभावित हैं.

जनप्रतिनिधियों ने प्रशासनिक कार्यशैली पर उठाए सवाल

मामले को लेकर स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों ने मोर्चा खोलते हुए प्रशासन से जवाब मांगा है:

  • उपमुखिया प्रतिनिधि का बयान: तातपौआ पंचायत के उपमुखिया प्रतिनिधि सह वार्ड 07 के पार्षद प्रतिनिधि मोहम्मद शमीम अख्तर ने बताया कि वे कई बार लाभुकों के साथ प्रखंड व अंचल कार्यालय गए हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई. उन्होंने कहा कि गरीबों को बार-बार दौड़ाना बेहद अमानवीय है.
  • मुखिया प्रतिनिधि ने उठाई आवाज: मुखिया प्रतिनिधि मोहम्मद रासमुद्दीन फैज ने सवाल किया कि जब ये सभी परिवार बिहार सरकार के बासगीत पर्चा प्रावधान के तहत पूरी तरह पात्र हैं, तो उन्हें अपने ही अधिकार के लिए दफ्तरों के आगे गिड़गिड़ाने पर क्यों मजबूर किया जा रहा है?

बासगीत पर्चा: सिर्फ जमीन का टुकड़ा नहीं, सुरक्षा और भविष्य का सवाल

भूमिहीन परिवारों के लिए यह केवल जमीन का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि उनकी आने वाली पीढ़ी की सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा मामला है:

  • सुरक्षित छत की उम्मीद: सालों से दूसरों की जमीन या असुरक्षित जगहों पर झोपड़ी बनाकर रह रहे इन परिवारों की मांग है कि राजस्व विभाग तुरंत स्थल जांच पूरी करे.
  • कार्रवाई की मांग: ग्रामीणों ने जिलाधिकारी (DM) और अंचलाधिकारी (CO) से अपील की है कि पात्र लाभुकों की सूची का सत्यापन कर अविलंब जमीन का पर्चा और दखल-कब्जा दिलाया जाए.

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लेखक के बारे में

By बच्छराज

बच्छराज प्रिंट माध्यम में 25 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. ठाकुरगंज (किशनगंज) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक कार्यों, शिक्षा, राजनीति व खेल में रुचि रखते हैं.

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