KISHANGANJ कोमल पत्तियों के बीच मेहनत की ''तपिश''तब मिलती है कड़क चाय

ठाकुरगंज के चाय बागानों में सुबह होते ही मजदूरों की कतारें हरियाली के बीच उतर जाती हैं.

ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट :

ठाकुरगंज के चाय बागानों में सुबह होते ही मजदूरों की कतारें हरियाली के बीच उतर जाती हैं. हाथों में टोकरी और उंगलियों की तेजी के साथ कोमल पत्तियों की तुड़ाई शुरू हो जाती है. सुबह की ठंडक में काम की रफ्तार तेज रहती है और हर मजदूर ज्यादा से ज्यादा पत्तियां तोड़ने की कोशिश में जुटा दिखता है. लेकिन जैसे ही सूरज चढ़ता है, हालात बदलने लगते हैं. तेज धूप और बढ़ती गर्मी बागानों को तपिश में बदल देती है. दोपहर तक पहुंचते-पहुंचते मजदूरों की रफ्तार थमने लगती है, पसीना और थकान साफ नजर आने लगती है.मजदूरों का कहना है कि सुबह के कुछ घंटों में ही पूरा दिन निकालने जितना काम करना पड़ता है, क्योंकि बाद में गर्मी काम को मुश्किल बना देती है. इसके बावजूद रोजी-रोटी की मजबूरी उन्हें इसी चक्र में बांधे रखती है. चाय बागानों की यह तस्वीर साफ बताती है कि हर कप चाय के पीछे सुबह की तेजी और दोपहर की तपिश से जूझते मजदूरों की कड़ी मेहनत छिपी है.

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By AMIT KUMAR SINH

AMIT KUMAR SINH is a contributor at Prabhat Khabar.

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