बाल विवाह मुक्त भारत का लक्ष्य अब दूर नहीं, जन निर्माण केंद्र की मुहिम लायी रंग

बाल विवाह मुक्त भारत का लक्ष्य अब दूर नहीं, जन निर्माण केंद्र की मुहिम लायी रंग

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर कृषि विज्ञान केंद्र में कार्यक्रम आयोजित, 1430 किमी की यात्रा कर थमा बाल विवाह मुक्ति रथ

किशनगंज. अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर रविवार को जन निर्माण केंद्र की पहल पर कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस अवसर पर जिले में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से निकले ”बाल विवाह मुक्ति रथ” की 30 दिवसीय यात्रा का भी समापन हुआ. कार्यक्रम में केवीके के अधिकारी, बाल कल्याण समिति के सदस्य और जिला प्रशासन के पदाधिकारियों सहित विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया.

बदलाव का संदेश लेकर 51 गांवों में पहुंचा रथ

भारत सरकार के केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान के तहत जन निर्माण केंद्र ने जिले के सुदूर क्षेत्रों में अलख जगायी. पिछले 30 दिनों में बाल विवाह मुक्ति रथ ने जिले के 1430 किलोमीटर की दूरी तय की व 51 गांवों के लोगों को इस कुप्रथा के खिलाफ एकजुट किया. जन निर्माण केंद्र, जो कि देश के सबसे बड़े नेटवर्क ”जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन” का सहयोगी संगठन है, बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए जमीनी स्तर पर कार्य कर रहा है.

बाल विवाह सामाजिक कुप्रथा नहीं, बल्कि अपराध : राकेश सिंह

जन निर्माण केंद्र के निदेशक राकेश कुमार सिंह ने अभियान की सफलता पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि यह रथ यात्रा महज प्रतीकात्मक नहीं थी, बल्कि पहियों पर बदलाव का एक संदेश था. उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि बाल विवाह कोई सामान्य सामाजिक बुराई नहीं, बल्कि विवाह की आड़ में बच्चों के साथ होने वाला दुष्कर्म है. यह एक दंडनीय अपराध है, जो बच्चियों को कुपोषण, अशिक्षा व गरीबी के दुष्चक्र में धकेल देता है. उन्होंने विश्वास जताया कि जन भागीदारी से किशनगंज जल्द ही बाल विवाह मुक्त बनेगा.

महिलाओं ने कुप्रथा को जड़ से मिटाने का लिया संकल्प

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित महिलाओं व स्वयंसेवकों ने समाज से इस कुप्रथा को जड़ से मिटाने का संकल्प लिया. वक्ताओं ने जोर दिया कि बच्चियों के जीवन को पुष्पित-पल्लवित होने देने के लिए उन्हें शिक्षा और सुरक्षा देना अनिवार्य है. मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे.

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Author: AWADHESH KUMAR

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