ठाकुरगंज में दर्जी की अस्थायी दुकान हुई जमींदोज, रोजी-रोटी पर संकट

Thakurganj Storm: ठाकुरगंज हटिया परिसर में शनिवार शाम आए भीषण आंधी-तूफान ने एक गरीब दर्जी के आशियाने और आजीविका को उजाड़ दिया. पिछले एक साल से स्थायी दुकान की आस में अस्थायी ढांचे में सिलाई मशीन चला रहे मो. साइदर रजा का पूरा काउंटर मलबे में तब्दील हो गया है.

ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट

Thakurganj Storm: ठाकुरगंज नगर के मुख्य हटिया परिसर में शनिवार की शाम आई तेज आंधी और चक्रवाती तूफान ने छोटे दुकानदारों को भारी आर्थिक चोट पहुंचाई है. तूफान के तीव्र झोंकों के कारण हटिया में सिलाई का काम करने वाले दर्जी मो. साइदर रजा की अस्थायी दुकान पलभर में धराशायी हो गई. रविवार सुबह जब पीड़ित दुकानदार मौके पर पहुंचा, तो दुकान का पूरा ढांचा मलबे के रूप में बिखरा पड़ा था. बांस के खंभे टूट चुके थे, शेड के ऊपर लगी तिरपाल हवा में उड़ गई थी और कार्यस्थल पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था, जिससे उनके सामने परिवार के भरण-पोषण का गंभीर संकट खड़ा हो गया है.

एक साल से स्थायी दुकान का इंतजार, टूटे मलबे के बीच फिर थामी मशीन

ठाकुरगंज हटिया में पिछले एक वर्ष से जीर्णोद्धार (पुनर्निर्माण) का कार्य चल रहा है. इस वजह से मो. साइदर रजा जैसे कई छोटे फुटपाथी दुकानदार प्रशासन द्वारा स्थायी दुकान अलॉट किए जाने की उम्मीद में बांस-तिरपाल के सहारे अपना कारोबार खींच रहे थे. इस अचानक आई आपदा ने उनकी कमर तोड़ दी है. हालांकि, इस भारी नुकसान के बावजूद पीड़ित दर्जी ने हिम्मत नहीं हारी है. रोजी-रोटी की कड़ियों को जोड़े रखने के लिए उन्होंने रविवार दोपहर को खुले आसमान के नीचे टूटे हुए मलबे के बीच ही दोबारा सिलाई मशीन स्थापित कर काम शुरू करने का साहसिक प्रयास किया है ताकि बच्चों को भूखा न सोना पड़े.

फुटपाथी दुकानदारों के पुनर्वास को लेकर उठने लगी मांग

व्यापारिक चिंता: “हटिया के सुस्त जीर्णोद्धार कार्य के कारण दर्जनों छोटे और सीमांत व्यवसायों को सालों से खुले आसमान के नीचे कड़ाके की धूप, बारिश और आंधी का सामना करना पड़ रहा है. प्रशासन को इन जरूरतमंदों के स्थाई पुनर्वास पर तुरंत ध्यान देना चाहिए.”

इस हादसे के बाद स्थानीय हटिया के दुकानदारों और बुद्धिजीवियों ने नगर प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित दर्जी को अविलंब सरकारी मुआवजा दिया जाए. साथ ही हटिया परिसर का निर्माण कार्य जल्द पूरा कर मो. साइदर रजा जैसे मेहनतकश लोगों को प्राथमिकता के आधार पर स्थायी दुकानें आवंटित की जाएं ताकि भविष्य में प्राकृतिक आपदाओं के कारण किसी गरीब की आजीविका न छिने.

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लेखक के बारे में

Published by: Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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