डायवर्शन से बढ़ी भीड़, भीषण उमस के बीच पीने के पानी को तरसे यात्री, नलों पर नहाने को मजबूर लोग

Thakurganj Railway Station: कटिहार रेल मंडल में ट्रेनों के रूट डायवर्शन के कारण ठाकुरगंज रेलवे स्टेशन पर यात्रियों का दबाव कई गुना बढ़ गया है. इस बीच, भीषण उमस और गर्मी के बीच स्टेशन पर पीने के पानी (पेयजल) की भारी किल्लत हो गई है, जिससे यात्रियों को बूंद-बूंद पानी के लिए नलों पर लंबी कतारें लगानी पड़ रही हैं.

ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट

Thakurganj Railway Station: उत्तर बिहार और सीमांचल में पड़ रही चिलचिलाती धूप और उमस भरी गर्मी के बीच रेल यात्रियों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. कटिहार रेल मंडल में चल रहे तकनीकी कार्यों के कारण कई एक्सप्रेस ट्रेनों को ठाकुरगंज रेलखंड से डायवर्ट (परिवर्तित मार्ग) कर चलाया जा रहा है. इस वजह से ठाकुरगंज रेलवे स्टेशन पर अचानक यात्रियों की संख्या और चहल-पहल अप्रत्याशित रूप से बढ़ गई है. लेकिन यात्रियों की इस बढ़ती आमद के बीच मंगलवार सुबह स्टेशन प्रशासन की लचर व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं के अभाव की पोल खुलकर सामने आ गई. चिलचिलाती गर्मी में यात्रियों को स्टेशन पर शुद्ध पेयजल (पीने का पानी) तक नसीब नहीं हो रहा है, जिससे लोग पानी की तलाश में प्लेटफार्म पर इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं.

गिने-चुने नलों पर लगी लंबी कतारें; पानी पीने के स्थान पर स्नान कर रहे लोग

  • नाकाफी साबित हो रहे हैं नल: यात्रियों ने बताया कि प्लेटफार्म पर मौजूद गिने-चुने नलों में ही पानी आ रहा है. ट्रेनों के रुकते ही इन नलों पर सैकड़ों यात्रियों की भारी भीड़ और लंबी कतारें लग जाती हैं. कई बार कतार में खड़े-खड़े ही ट्रेन खुल जाती है और यात्री प्यासे ही रह जाते हैं.
  • राहत पाने के लिए नलों पर स्नान: सुबह के समय उमस का ग्राफ इतना अधिक था कि ट्रेन से उतरे स्थानीय लोग और यात्री गर्मी से निजात पाने के लिए पेयजल वाले नलों पर ही सीधे नहाने (स्नान करने) लगे. इस वजह से दूर-दराज की ट्रेनों से पानी भरने पहुंचे यात्रियों को भारी फजीहत और असहजता का सामना करना पड़ा.

वाटर कूलर और अतिरिक्त स्टैंड गायब; वेंडर कर रहे बोतलबंद पानी की महँगी लूट

जेब पर पड़ रहा है अतिरिक्त डाका: प्लेटफार्म पर वाटर कूलर या ठंडे पानी की मशीनें क्रियाशील न होने के कारण गरीब और मध्यमवर्गीय यात्रियों को विवश होकर प्लेटफार्म के स्टॉलों से ₹15 से ₹20 की महँगी बोतलबंद पानी की बोतलें खरीदनी पड़ रही हैं. जो यात्री महँगा पानी खरीदने में सक्षम नहीं हैं, वे इस भीषण गर्मी में प्यास से व्याकुल दिख रहे हैं.

यात्रियों का कहना है कि रेलवे को यह अच्छी तरह पता था कि ट्रेनों के डायवर्शन के कारण ठाकुरगंज में वीआईपी ट्रेनों का ठहराव और यात्रियों की संख्या बढ़ेगी, इसके बावजूद गर्मी के इस पीक सीजन में अतिरिक्त वाटर स्टैंड या अस्थाई प्याऊ की व्यवस्था न करना रेल प्रशासन की घोर संवेदनशीलता को दर्शाता है.

रेलवे प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग:

ठाकुरगंज के स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों और दैनिक यात्री संघ ने पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (NFR) के वरीय अधिकारियों और सीनियर डीसीएम (Sr. DCM) से मांग की है कि:

  1. अतिरिक्त प्याऊ की व्यवस्था: समर सीजन को देखते हुए प्लेटफार्म संख्या-1 और 2 पर तत्काल अस्थाई वाटर बूथ और हाई-कैपेसिटी वाले वाटर कूलर चालू किए जाएं.
  2. आरपीएफ की निगरानी: पीने के पानी के नलों पर स्नान करने या कपड़े धोने वालों पर रोक लगाने के लिए आरपीएफ (RPF) के जवानों की तैनाती की जाए, ताकि पेयजल की स्वच्छता बनी रहे.
  3. अनाउंसमेंट व सतर्कता: स्टेशन पर पानी की उपलब्धता को लेकर नियमित रूप से लाउडस्पीकर से अनाउंसमेंट कराया जाए. स्थानीय युवाओं ने चेतावनी दी है कि यदि अगले 24 घंटे के भीतर पेयजल संकट दूर नहीं हुआ, तो वे स्टेशन मास्टर के कक्ष का घेराव करेंगे.

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लेखक के बारे में

Published by: Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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