दिल्ली से गुवाहाटी तक रेल नेटवर्क को मल्टी-ट्रैकिंग के जरिए मजबूत करने की केंद्र सरकार की वृहद योजना में बिहार और विशेषकर सीमांचल का इलाका एक महत्वपूर्ण 'कनेक्टिंग लिंक' के रूप में उभर रहा है. केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा साझा किए गए रूट मैप के अनुसार, दिल्ली से गोरखपुर होते हुए नरकटियागंज–रक्सौल–सीतामढ़ी–सरायगढ़–अररिया और आगे न्यू जलपाईगुड़ी (NJP) होते हुए गुवाहाटी तक एक सशक्त रेल नेटवर्क बिछाने की तैयारी है. इस महात्वाकांक्षी परियोजना के धरातल पर उतरने से सीमांचल के ठाकुरगंज का रेलवे मानचित्र पूरी तरह बदल जाएगा और यह दिल्ली-पूर्वोत्तर कनेक्टिविटी का एक प्रमुख केंद्र बन जाएगा.
मौजूदा स्थिति और सीमांचल की स्वीकृत रेल परियोजनाएं
सीमांचल में रेलवे क्षमता बढ़ाने के लिए कई परियोजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है:
- अररिया–गलगलिया रेल लाइन: अररिया से ठाकुरगंज की दिशा में सिंगल रेल लाइन का संपर्क विकसित हो चुका है. भविष्य की जरूरतों को देखते हुए इसके दोहरीकरण (Doubling) के लिए किशनगंज जिला प्रशासन ने अगस्त 2026 में भूमि अधिग्रहण की प्रारंभिक अधिसूचना भी जारी कर दी है.
- अलुआबाड़ी रोड–ठाकुरगंज: 19.95 किलोमीटर डबलिंग (दोहरीकरण) परियोजना को पूर्व में ही स्वीकृति मिल चुकी है.
- ठाकुरगंज–सिलीगुड़ी: इस 56.41 किलोमीटर लंबे रेलखंड के दोहरीकरण से भी इस रूट की क्षमता में भारी इजाफा होगा.
ठाकुरगंज–चतरहाट नई ब्रॉडगेज लाइन: सर्वे का काम तेज
ठाकुरगंज के आसपास रेल संपर्क के नए विकल्प तैयार किए जा रहे हैं:
- नई रेल लाइन का विकल्प: ठाकुरगंज–चतरहाट के बीच 24.40 किलोमीटर लंबी नई ब्रॉडगेज रेल लाइन के लिए 'फाइनल लोकेशन सर्वे' और मिट्टी जांच का काम युद्धस्तर पर चल रहा है.
- NJP से सीधा जुड़ाव: चतरहाट पहले से ही अलुआबाड़ी रोड–न्यू जलपाईगुड़ी (NJP) सेक्शन पर स्थित है. साथ ही उत्तर बंगाल में अलुआबाड़ी रोड–NJP के बीच करीब 57 किलोमीटर तीसरी-चौथी लाइन परियोजना को भी हरी झंडी मिल चुकी है.
भविष्य की तस्वीर: एक स्टेशन नहीं, जंक्शन बनेगा ठाकुरगंज
इन सभी कड़ियों के जुड़ने से सीमांचल को कई फायदे होने वाले हैं:
- अररिया से सीधा NJP का विकल्प: अररिया–ठाकुरगंज और ठाकुरगंज–चतरहाट रेल संपर्क पूरा होने पर, अररिया से ठाकुरगंज और चतरहाट होते हुए सीधे न्यू जलपाईगुड़ी के लिए एक बेहतरीन वैकल्पिक मार्ग तैयार हो जाएगा.
- यात्री और माल ढुलाई में क्रांति: यह नई कड़ी सीमांचल को उत्तर बंगाल के मौजूदा नेटवर्क से एक अतिरिक्त दिशा में जोड़ देगी, जिससे दिल्ली-गुवाहाटी कॉरिडोर पर माल और यात्री परिवहन के लिए एक नया और तेज विकल्प मिलेगा.
