शराबबंदी के साये में शर्मसार हो रही नई हटिया, दुकानों की सीढ़ियों पर बिखरी मिलीं शराब की बोतलें

Thakurganj Nai Hatiya Ground Report: जिस नई हटिया को ठाकुरगंज के व्यापार, रोजगार और तरक्की का नया चेहरा बनना था, आज वही परिसर बदहाली और शराबखोरी का अड्डा बन चुका है. करोड़ों की लागत से बनी दुकानों के ताले खुलने से पहले ही वहां जो नजारा देखने को मिल रहा है, उसने स्थानीय लोगों को झकझोर कर रख दिया है.

Thakurganj Nai Hatiya Ground Report: ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट: किशनगंज जिले के ठाकुरगंज में विकास और रोजगार की उम्मीदों पर असामाजिक तत्व पानी फेर रहे हैं. बिहार में पूर्ण शराबबंदी कानून लागू होने के बावजूद, ठाकुरगंज की नई हटिया परिसर से आई तस्वीरें बेहद चौंकाने वाली हैं. यहां नवनिर्मित दुकानों की सीढ़ियों और कोनों में शराब की खाली बोतलें बिखरी मिली हैं, जो स्थानीय प्रशासन और कानून-व्यवस्था की पोल खोल रही हैं.

करोड़ों की लागत से बनी दुकानें आवंटन से पहले ही बदहाल

जानकारी के अनुसार, करोड़ों रुपये की भारी-भरकम लागत से इस नई हटिया का निर्माण कराया गया था ताकि स्थानीय कारोबार को रफ्तार मिल सके. लेकिन, प्रशासनिक उदासीनता के कारण ये दुकानें अभी तक आवंटन की प्रतीक्षा में बंद पड़ी हैं. जिन दुकानों में व्यापारियों की चहल-पहल और ग्राहकों की रौनक होनी चाहिए थी, वहां अब शाम ढलते ही असामाजिक तत्वों और शराबियों का जमावड़ा लगने लगा है. देखरेख और सुरक्षा की कमी के कारण यह पूरा व्यावसायिक परिसर धीरे-धीरे अपराधियों की सुरक्षित पनाहगाह बनता जा रहा है.

शाम ढलते ही रास्ते से गुजरने में डरती हैं महिलाएं

स्थानीय निवासियों का कहना है कि नई हटिया से क्षेत्र के छोटे व्यापारियों और बेरोजगार युवाओं को बड़ी उम्मीदें थीं. लोगों ने सपना देखा था कि यहां एक व्यवस्थित बाजार बनेगा जिससे पूरे इलाके की सूरत बदलेगी. लेकिन, वर्तमान हालात ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. स्थानीय महिलाओं और बुजुर्गों का कहना है कि शाम होने के बाद इस रास्ते से गुजरने में भी भारी असहजता और डर महसूस होता है. जब सार्वजनिक स्थानों पर खुलेआम शराब पीने के सबूत मिलने लगें, तो आम नागरिकों की सुरक्षा पर सवाल उठना लाजिमी है.

स्थानीय लोगों की मांग: जल्द हो आवंटन, बढ़े पुलिस की गश्त

इस बदहाली को लेकर ठाकुरगंज के प्रबुद्ध नागरिकों ने जिला प्रशासन से भावुक अपील की है कि नई हटिया को बदनामी का केंद्र बनने से बचाया जाए. स्थानीय लोगों ने मांग की है कि:

  • बंद पड़ी दुकानों का जल्द से जल्द आवंटन कर बाजार चालू किया जाए.
  • असामाजिक तत्वों को खदेड़ने के लिए परिसर में नियमित पुलिस गश्ती (पेट्रोलिंग) बढ़ाई जाए.
  • पूरे परिसर की निगरानी के लिए मुख्य बिंदुओं पर सीसीटीवी (CCTV) कैमरे इंस्टॉल किए जाएं.
  • खुलेआम शराब का सेवन करने और माहौल बिगाड़ने वालों पर सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए.

नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो ठाकुरगंज के विकास की इस बड़ी परियोजना पर शराबखोरी और गंदगी का कभी न मिटने वाला दाग लग जाएगा.

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Published by: Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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