ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट
Regal Factory: बिहार के प्रमुख मक्का उत्पादक बेल्ट माने जाने वाले सीमांचल के किशनगंज जिला अंतर्गत ठाकुरगंज और आस-पास के मक्का बाजार में अचानक तेजी के संकेत मिलने लगे हैं. पिछले करीब एक सप्ताह से सुस्त पड़े मक्का के कारोबार को अब पंख लगते दिख रहे हैं. क्षेत्र की प्रतिष्ठित रीगल रिसोर्सेस लिमिटेड (गलगलिया मक्का फैक्ट्री) ने पूरे छह दिनों के ठहराव के बाद अपनी आधिकारिक खरीद दर में ₹30 प्रति क्विंटल (30 पैसे प्रति किलो) की उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की है. इस मूल्य वृद्धि और भारी मांग के चलते स्थानीय कृषि मंडियों और किसानों के बीच उत्साह का माहौल है.
₹18.70 से बढ़कर ₹19.00 प्रति किलो हुआ दाम; फैक्ट्रियों में बढ़ी हलचल
मक्का बाजार की इस नई तेजी की कड़ियों और व्यापारिक आंकड़ों को देखें तो मुख्य बदलाव इस प्रकार आए हैं:
- दरों में संशोधन: गलगलिया मक्का फैक्ट्री में बीते 6 जून से मक्के की खरीद दर ₹18.70 प्रति किलोग्राम (₹1,870 प्रति क्विंटल) पर पूरी तरह स्थिर चल रही थी.
- नया रेट चार्ट: बाजार की मजबूत मांग को देखते हुए फैक्ट्री प्रबंधन ने 12 जून से इस दर को संशोधित कर ₹19.00 प्रति किलोग्राम (₹1,900 प्रति क्विंटल) कर दिया है.
- पावाखाली रैक प्वाइंट पर सरगर्मी: इसी बीच पावाखाली रैक प्वाइंट से मक्का की तीन विशाल मालगाड़ी (रैक) लोड होकर देश के विभिन्न राज्यों के गंतव्यों के लिए रवाना हुई हैं. एक साथ इतनी बड़ी मात्रा में मक्के की निकासी ने थोक बाजार की हलचल को और ज्यादा बढ़ा दिया है.
बाहरी राज्यों के बड़े खरीदार सक्रिय; स्थानीय मंडियों में बढ़ी प्रतिस्पर्धा
व्यापारिक सूत्रों और आढ़तियों के अनुसार, इस समय किशनगंज, ठाकुरगंज और पौआखाली (पावाखाली) क्षेत्र में देश के विभिन्न राज्यों जैसे—पोल्ट्री फीड और स्टार्च बनाने वाली फैक्ट्रियों के कई बड़े और छोटे कॉर्पोरेट खरीदार पूरी तरह सक्रिय हैं. ये खरीदार दक्षिण भारतीय राज्यों और पोल्ट्री हब की मांग के अनुसार स्थानीय स्तर पर मक्का की आक्रामक तरीके से खरीदारी कर रहे हैं. पावाखाली रैक प्वाइंट से लगातार हो रहे इस उठाव और बड़े खरीदारों द्वारा अचानक दरें बढ़ाने को बाजार के जानकार आने वाले समय में बड़ी तेजी का पूर्व संकेत मान रहे हैं.
“बेहतर दाम मिलने की जगी उम्मीद”: किसानों और आढ़तियों ने जताया संतोष
किसानों की आस: इस साल मौसम की बेरुखी और लागत बढ़ने से किसान परेशान थे. अब फैक्ट्रियों और रैक लोडिंग के कारण दाम में जो सुधार दिख रहा है, उससे लागत निकलने और मुनाफे की उम्मीद जगी है.
ठाकुरगंज प्रखंड के प्रगतिशील किसानों का कहना है कि यदि सरकारी और निजी स्तर पर खरीद मूल्य में इसी तरह की बढ़ोतरी जारी रही, तो उन्हें अपनी उपज का वाजिब और सम्मानजनक दाम मिल सकेगा. वहीं, स्थानीय व्यापारिक हलकों में यह प्रबल चर्चा है कि यदि देशव्यापी मांग और रैक से माल की निकासी का यही आक्रामक रुख जारी रहा, तो आगामी कुछ सप्ताह के भीतर मक्का के भाव ₹2,000 प्रति क्विंटल के आंकड़े को भी पार कर सकते हैं. फिलहाल, मक्का के बदलते मिजाज ने पूरे सीमांचल के कृषि बाजार का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है.
