ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट
Thakurganj Fish Market: सीमांचल प्रक्षेत्र के किशनगंज जिला अंतर्गत ठाकुरगंज प्रखंड से सरकारी विसंगतियों और विभागीय उदासीनता का एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है. क्षेत्र के मछली व्यवसायियों को आधुनिक सुविधाएं देने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति देने के उद्देश्य से करीब 2.95 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से एक भव्य व आधुनिक मत्स्य बाजार का संधारण किया गया था. भवन से लेकर चमचमाती दुकानें तक सब कुछ पूरी तरह तैयार हैं, और तो और आठ महीने पहले इसका हाई-प्रोफाइल उद्घाटन भी संधारित हो चुका है. लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इस बाजार का ताला आज तक नहीं खुला है और यहां व्यापार की एक भी कड़ी शुरू नहीं हो सकी है. पूरी योजना अब फाइलों के जाल और अंतर-विभागीय कप्तानों की खींचतान में फंसकर रह गई है.
22 सितंबर को हुआ था उद्घाटन, अप्रैल में उजागर हुई कड़ियों की उलझन
- सगात बनी मुसीबत: मुख्यमंत्री मत्स्य विपणन योजना के तहत निर्मित इस आधुनिक बाजार का उद्घाटन पिछले वर्ष 22 सितंबर 2025 को बड़ी उम्मीदों और चुनावी तालियों के बीच किया गया था. दावा था कि इससे कनिष्ठ व वरिष्ठ मछली विक्रेताओं को गंदगी से संबल (निजात) मिलेगी.
- हस्तांतरण का पेच: उद्घाटन के महीनों बाद तक जब बाजार शुरू नहीं हुआ, तो फाइलों की परतें खुलीं. 8 अप्रैल 2026 को जिला मत्स्य पदाधिकारी, किशनगंज ने नगर पंचायत ठाकुरगंज को एक कड़ा पत्र भेजा. इसमें स्पष्ट किया गया कि नवनिर्मित बाजार का विधिवत भौतिक हस्तांतरण (Handover) अब तक मत्स्य विभाग को नहीं किया गया है. विभाग ने सरकारी आदेश का हवाला देते हुए दावा किया कि दुकानों का आवंटन, किराया निर्धारण और राजस्व वसूली की पूरी कमान मत्स्य विभाग के अधीन है.
- मार्गदर्शन की गुहार: इसके ठीक दस दिन बाद, 18 अप्रैल 2026 को नगर पंचायत ठाकुरगंज के कार्यपालक पदाधिकारी ने कमान संभालते हुए जिला पदाधिकारी (DM) को पत्र लिखकर आधिकारिक मार्गदर्शन मांगा. नगर पंचायत का कहना है कि संयुक्त बजटीय निर्देशों के आलोक में अनुरक्षण की जिम्मेदारी मत्स्य विभाग को दी जानी है, अतः डीएम स्तर से इसके लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं.
“यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि जनता के टैक्स के लगभग तीन करोड़ रुपये से बना हाइटेक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रशासनिक तालमेल की कमी के कारण बेकार खड़ा है. दुकानें आवंटित न होने से हमारे स्थानीय गरीब मछली कारोबारियों को आज भी सड़क किनारे धूल और गंदगी के बीच असुविधाजनक स्थिति में व्यापार करना पड़ रहा है.” — कौशल किशोर यादव, जिला प्रवक्ता, भाजपा
पूर्व मंत्री लेसी सिंह तक पहुंचा मामला; बीजेपी प्रवक्ता ने उठाए सवाल
इस प्रशासनिक गतिरोध को देखते हुए 15 जून 2026 को भाजपा जिला प्रवक्ता कौशल किशोर यादव ने सीधे बिहार विधान परिषद सदस्य (MLC) एवं पूर्व मंत्री लेसी सिंह को एक पत्र प्रेषित कर इस गंभीर विसंगति में तत्काल उच्च स्तरीय हस्तक्षेप करने की मांग की है, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मुस्तैद हो गई है.
कब खुलेगा ताला? पूरा ठाकुरगंज कर रहा है अंतिम आदेश का इंतजार
स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों और मत्स्य जीवी सहयोग समिति के कप्तानों का कहना है कि इस आधुनिक बाजार में कोल्ड स्टोरेज, वेस्ट मैनेजमेंट और स्वच्छ कटिंग जोन जैसी बेहतरीन तकनीकी कड़ियां जोड़ी गई हैं. इसके शुरू होने से क्षेत्र के सैकड़ों कली-मजदूरों और बेरोजगार युवाओं को प्रत्यक्ष रोजगार का संबल मिल सकता है.
मगर वर्तमान स्थिति यह है कि एक विभाग हस्तांतरण की फाइल अटकी होने का रोना रो रहा है, तो दूसरा विभाग वरीय प्रशासनिक आदेशों की कड़ियों का इंतजार कर रहा है. अब देखना बेहद दिलचस्प होगा कि जिला प्रशासन इस करोड़ों के प्रोजेक्ट को चालू कराने के लिए कब कड़ा रुख अख्तियार करता है और ठाकुरगंज के मछली व्यापारियों का यह लंबा और अंतहीन इंतजार कब समाप्त होता है.
