मुख्य बातें:
पौआखाली (किशनगंज) से रणविजय की रिपोर्ट
Rasiya Panchayat Mahadalit Tola: बिहार के सीमांचल क्षेत्र अंतर्गत किशनगंज जिले के ठाकुरगंज प्रखंड से विकास योजनाओं में स्थानीय लापरवाही और प्रशासनिक विफलता का एक बड़ा मामला सामने आया है. रसिया पंचायत के वार्ड संख्या-04 स्थित महादलित टोला आज के डिजिटल युग में भी शुद्ध पेयजल और बुनियादी स्वास्थ्य जैसी अति आवश्यक सरकारी सुविधाओं के लिए तरस रहा है. धरातल पर योजनाओं के क्रियान्वयन में बरती जा रही सुस्ती के कारण स्थानीय महादलित समाज के नागरिकों में व्यवस्था के खिलाफ गहरा असंतोष और आक्रोश पनप रहा है.
सरकारी नल सूखे, निजी चापाकलों के भरोसे प्यास बुझा रहे ग्रामीण
टोले में सात निश्चय योजना के तहत क्रियान्वित की गई “हर घर नल का जल” योजना पूरी तरह कागजी और विफल साबित हो रही है. योजना के जमीनी आंकड़े और विसंगतियों की मुख्य कड़ियां इस प्रकार हैं:
- दिखावे के नल: विभाग द्वारा टोले के घरों में सरकारी पाइपलाइन बिछाकर नल तो टांग दिए गए हैं, लेकिन उनमें आज तक पानी की एक बूंद भी नहीं टपकी है.
- आर्थिक बोझ: सरकारी जलापूर्ति ठप होने के कारण इस निर्धन वर्ग के ग्रामीणों को अपनी गाढ़ी कमाई खर्च कर निजी स्तर पर चापाकल (Handpump) लगवाने पड़े हैं. वर्तमान में पूरा टोला इन्हीं चापाकलों के सहारे अपनी प्यास बुझाने और घरेलू कार्यों को निपटाने के लिए मजबूर है.
जमीन विवाद में फंसा स्वास्थ्य भवन का निर्माण, 9 माह से काम बंद
पेयजल संकट के अलावा, इस महादलित टोले में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति भी अत्यंत दयनीय बनी हुई है.
- भवन का धस्तीकरण: टोले में स्थित दशकों पुराने उप-स्वास्थ्य केंद्र (Health Sub-Centre) का सरकारी भवन बेहद जर्जर हो चुका था, जिसे सुरक्षा के लिहाज से करीब नौ महीने पहले विभाग द्वारा ध्वस्त करा दिया गया था.
- जमीन का पेंच: ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, नए भवन के निर्माण के लिए स्वीकृत राशि आने के बावजूद अब तक काम शुरू नहीं हो सका है. दरअसल, स्वास्थ्य विभाग की इस जमीन को लेकर स्थानीय स्तर पर मालिकाना हक का विवाद उत्पन्न हो गया है. एक स्थानीय व्यक्ति द्वारा इस भूमि पर अपना निजी दावा ठोका जा रहा है.
- विधिक त्रुटि: विभागीय कड़ियों की पड़ताल से पता चला है कि यह सरकारी भूमि पूर्व में नियमानुसार बिहार के राज्यपाल के नाम से निबंधित (Registered) नहीं कराई गई थी, जिसका फायदा असामाजिक तत्व उठा रहे हैं. कई बार निर्माण एजेंसी और संवेदक (ठेकेदार) के कर्मी मटीरियल लेकर मौके पर पहुंचे, लेकिन भूमि विवाद और विरोध के कारण उन्हें बैरंग वापस लौटना पड़ा.
अधूरा पड़ा महादलित चबूतरा, व्यवस्था पर उठे सवाल
प्रशासनिक उपेक्षा यहीं खत्म नहीं होती; महादलित मिशन के तहत टोले की सामाजिक बैठकों और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए बनने वाला सामुदायिक चबूतरा भी पिछले एक साल से अधूरा (Half-Constructed) पड़ा हुआ है. ठेकेदार द्वारा अचानक काम बंद कर दिए जाने के कारणों की स्पष्ट आधिकारिक जानकारी न तो पंचायत प्रतिनिधियों के पास है और न ही अंचल कार्यालय के पास.
Rasiya Panchayat Mahadalit Tola: स्थानीय स्तर पर तंत्र पूरी तरह विफल
“व्यवस्था की कड़वी हकीकत को बयां करते हुए टोला निवासी जयनारायण राय ने कहा कि सूबे के मुख्यमंत्री पटना से लगातार महादलितों के कल्याण की घोषणाएं करते हैं, लेकिन ठाकुरगंज के स्थानीय अधिकारी और बिचौलिए उन योजनाओं को धरातल पर दम तुड़वा देते हैं. वहीं, रसिया पंचायत के पैक्स अध्यक्ष सह भाजपा नेता नरेश कुमार गणेश ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि महादलित टोले के साथ यह सौतेला व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि अंचल अधिकारी (CO) के जरिए तुरंत विवादित भूमि की मापी कराकर उसे अतिक्रमण मुक्त कराया जाए और स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण अविलंब बहाल किया जाए.”
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टोले के प्रबुद्ध नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि मानसून की भारी बारिश के बीच उनके वार्ड में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति बहाल नहीं की गई और अधूरे विकास कार्यों को शुरू नहीं कराया गया, तो वे अनुमंडल मुख्यालय पर शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे.
