विकास चाहिए, लेकिन पेड़ की कीमत पर नहीं! ठाकुरगंज स्टेशन के अमृत भारत गेट निर्माण स्थल पर बवाल, पीपल बचाने पर अड़े लोग

ठाकुरगंज रेलवे स्टेशन पर अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत निर्माण कार्य एक हरे-भरे पेड़ के कारण विवादों में घिर गया है। स्थानीय लोगों ने पेड़ को बचाने के लिए प्रदर्शन किया है, जिससे विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच एक नई बहस छिड़ गई है।

किशनगंज, ठाकुरगंज से बच्छराज नखत की रिपोर्ट. एक तरफ आधुनिक रेलवे स्टेशन का सपना है और दूसरी तरफ वर्षों से लोगों को छांव देता हरा-भरा पेड़. अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत ठाकुरगंज रेलवे स्टेशन के प्रस्तावित प्रवेश द्वार का निर्माण अब इसी पेड़ के लिए संकट बनता नजर आ रहा है. तीन दिन पहले स्थानीय लोगों के घोर विरोध के बाद फिलहाल निर्माण कार्य रुका हुआ है. नए स्थल पर काम शुरू नहीं होने से लोगों की चिंता बढ़ने लगी है कि आखिर इस छायादार पेड़ का भविष्य क्या होगा.

प्रवेश द्वार के स्थल को लेकर लोगों ने जतायी थी आपत्ति

तीन दिन पहले स्थानीय लोगों ने प्रस्तावित प्रवेश द्वार के स्थल को लेकर कड़ा विरोध जताया था. लोगों का कहना था कि मौजूदा स्थान पर गेट का निर्माण होने से सार्वजनिक चबूतरे के साथ वर्षों पुराना पीपल का पेड़ भी प्रभावित होगा. स्थानीय लोगों ने प्रवेश द्वार को दूसरी दिशा में कुछ दूरी पर स्थानांतरित करने की मांग की थी.

विरोध के बाद विधायक ने किया स्थल का निरीक्षण

स्थानीय लोगों के विरोध के बाद विधायक भी मौके पर पहुंचे और उनकी आपत्तियां सुनीं. उन्होंने निर्माण स्थल का जायजा लिया. इसके बाद फिलहाल निर्माण कार्य रोक दिया गया है. अब स्थानीय लोगों की नजर रेलवे के अगले फैसले पर टिकी है.

विकास चाहिए, पेड़ की कीमत पर नहीं

स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें स्टेशन के विकास से कोई आपत्ति नहीं है. अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत ठाकुरगंज स्टेशन का आधुनिकीकरण जरूरी है, लेकिन विकास की कीमत वर्षों पुराने पेड़ से नहीं चुकाई जानी चाहिए.

लोगों के मुताबिक प्रवेश द्वार को थोड़ा दक्षिण दिशा में सरकाया जा सकता है. इसके लिए प्रस्तावित रेल कोच रेस्टोरेंट के लिए रखे गए कोच को फिलहाल दूसरी जगह स्थानांतरित करना होगा. लेकिन कोच को हटाने का खर्च कौन उठाएगा, इसी सवाल पर मामला अटका हुआ बताया जा रहा है.

कोच हटे तो मिल सकती है प्रवेश द्वार के लिए वैकल्पिक जगह

वार्ड सदस्य अमित सिन्हा ने कहा कि जब गेट निर्माण के बाद प्रस्तावित रेल कोच रेस्टोरेंट को दूसरी जगह स्थानांतरित किया जाना ही है, तो रेलवे अभी उस कोच को वहां से क्यों नहीं हटा देता. इससे प्रवेश द्वार के लिए वैकल्पिक जगह मिल सकती है और पेड़ को भी बचाया जा सकता है.

गहरी खुदाई के बीच खड़ा पेड़, रेलवे के फैसले का इंतजार

फिलहाल निर्माण स्थल पर काम रुका हुआ है. गहरी खुदाई के बीच खड़ा हरा-भरा पेड़ पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल बन गया है. एक ओर ठाकुरगंज स्टेशन को आधुनिक स्वरूप देने की तैयारी है, तो दूसरी ओर स्थानीय लोग चाहते हैं कि इस आधुनिकता की कीमत शहर की पुरानी हरियाली से न वसूली जाए.

अब रेलवे के अगले कदम पर टिकी निगाह

अब देखना यह है कि निर्माण कार्य दोबारा शुरू होने पर रेलवे मौजूदा योजना के अनुसार ही आगे बढ़ता है या स्थानीय लोगों की आपत्ति को देखते हुए प्रवेश द्वार की जगह में बदलाव करता है. फिलहाल लोगों की नजर रेलवे के फैसले पर है और सवाल यही है कि आधुनिक स्टेशन के रास्ते में खड़ा यह हरा-भरा पेड़ बचेगा या विकास की भेंट चढ़ जाएगा.


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लेखक के बारे में

By बच्छराज

बच्छराज प्रिंट माध्यम में 25 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. ठाकुरगंज (किशनगंज) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक कार्यों, शिक्षा, राजनीति व खेल में रुचि रखते हैं.

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