ठाकुरगंज के निजी स्कूलों में शिक्षा विभाग के नए आदेश से हड़कंप: PRASHAST App 2.0 पर 31 जुलाई तक शिक्षकों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य

बिहार शिक्षा परियोजना परिषद के आदेश ने ठाकुरगंज के निजी स्कूलों में हलचल मचा दी है. 31 जुलाई 2026 तक सभी निजी शिक्षकों को PRASHAST App 2.0 पर अनिवार्य रूप से पंजीकृत कराना होगा. यह कदम शिक्षकों के डिजिटल डेटाबेस के निर्माण की ओर एक बड़ा कदम है.

बिहार शिक्षा परियोजना परिषद के एक ताजा आदेश ने किशनगंज जिले के ठाकुरगंज प्रखंड स्थित निजी (प्राइवेट) विद्यालयों के प्रबंधकों और शिक्षकों के बीच भारी हलचल पैदा कर दी है. विभाग ने राज्य के सभी सरकारी और निजी विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों का आगामी 31 जुलाई 2026 तक PRASHAST App 2.0 पर अनिवार्य पंजीकरण कराने का सख्त निर्देश जारी किया है. इसके बाद 15 अगस्त से 15 सितंबर तक विद्यार्थियों की विशेष स्क्रीनिंग की जाएगी. हालांकि विभागीय स्तर पर इसे दिव्यांग/विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CwSN) की पहचान से जुड़ी पहल बताया जा रहा है, लेकिन ठाकुरगंज के शिक्षा जगत में इसकी सबसे ज्यादा चर्चा निजी स्कूलों के फैकल्टी रिकॉर्ड्स को लेकर हो रही है.

UDISE रिकॉर्ड के आधार पर तैयार होगा शिक्षकों का डिजिटल डेटाबेस

अब तक ठाकुरगंज और आसपास के ग्रामीण इलाकों के कई निजी विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की वास्तविक योग्यता और जानकारी केवल विद्यालयी रजिस्टरों या फाइलों तक ही सीमित रहती थी.

  • डिजिटल पंजीकरण अनिवार्य: PRASHAST App 2.0 के माध्यम से अब प्रत्येक शिक्षक का डिजिटल पंजीकरण UDISE (यू-डाइस) रिकॉर्ड के आधार पर किया जाएगा.
  • पारदर्शिता की बयार: शिक्षा जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि इस व्यवस्था के लागू होते ही पहली बार निजी विद्यालयों के शिक्षकों का संपूर्ण ब्योरा एक केंद्रीयकृत और व्यवस्थित डिजिटल प्रणाली का हिस्सा बन जाएगा.

क्या खुलेगी निजी स्कूलों की पोल?

ठाकुरगंज में वर्षों से कुछ निजी विद्यालयों को लेकर अप्रशिक्षित (Unqualified) शिक्षकों की तैनाती, मनमाने शिक्षक रिकॉर्ड्स और मानक नियमों के उल्लंघन को लेकर उंगलियां उठती रही हैं. अभिभावकों द्वारा भी समय-समय पर इसकी शिकायतें की जाती रही हैं.

स्थानीय शिक्षा विशेषज्ञों का मत:

हालांकि विभागीय आदेश में कहीं भी यह नहीं लिखा है कि इस ऐप का उद्देश्य निजी स्कूलों की जांच करना या नियुक्तियों की वैधता परखना है. इसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों की पहचान करना ही है. लेकिन, जब हर शिक्षक की आईडी और UDISE डेटा आपस में लिंक होगा, तो कागजी रिकॉर्ड और धरातल की वास्तविक स्थिति के बीच का अंतर छुपाना स्कूल संचालकों के लिए बेहद मुश्किल हो जाएगा.

31 जुलाई की म्याद पर टिकीं सबकी निगाहें

जहाँ एक तरफ सरकारी विद्यालयों के शिक्षक पहले से ही विभागीय नियुक्ति, सेवा पुस्तिका (Service Book) और नियमित प्रशिक्षण प्रणाली के दायरे में आते हैं, वहीं निजी विद्यालयों के लिए यह प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण और निर्णायक मानी जा रही है. अब देखना यह दिलचस्प होगा कि 31 जुलाई तक कितने शिक्षकों का सफल पंजीकरण हो पाता है और क्या यह ऐप ठाकुरगंज के निजी विद्यालयों की वास्तविक शैक्षणिक गुणवत्ता की तस्वीर साफ कर पाएगा या महज एक रूटीन प्रक्रिया बनकर रह जाएगा.


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लेखक के बारे में

बच्छराज प्रिंट माध्यम में 25 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. ठाकुरगंज (किशनगंज) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक कार्यों, शिक्षा, राजनीति व खेल में रुचि रखते हैं.

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