पौआखाली से रणविजय की रिपोर्ट
Marketing Shed: किशनगंज जिले के पौआखाली नगर क्षेत्र के ऐतिहासिक व व्यस्ततम गुदरी बाजार से स्थानीय नगर प्रशासन की घोर लापरवाही और उदासीनता की एक बेहद डरावनी तस्वीर सामने आई है. यहाँ करीब तीन दशक (30 वर्ष) पूर्व निर्मित कराया गया सरकारी मार्केटिंग शेड पूरी तरह से जर्जर और खंडहर अवस्था में पहुंच चुका है. कंक्रीट के पिलर और बीम क्रैक हो चुके हैं, जिनसे जंग लगे लोहे के सरिए साफ दिखाई दे रहे हैं. इसके बावजूद, अपनी दो वक्त की रोटी और आजीविका चलाने के लिए लाचार फुटकर व्यवसाई आज भी इसी मौत के साए (जानलेवा शेड) के नीचे बैठकर अपनी दुकानें सजाने को मजबूर हैं. इस गंभीर प्रशासनिक बेरुखी को लेकर स्थानीय दुकानदारों और आम उपभोक्ताओं में नगर पंचायत प्रशासन के खिलाफ गहरा आक्रोश देखा जा रहा है.
भूकंप और आंधी ने तोड़ी कमर, प्लास्टिक तानकर भीगने से बच रहे दुकानदार
स्थानीय दुकानदारों ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि इस शेड की हालत पिछले कुछ सालों में अत्यधिक दयनीय हो गई है:
- प्राकृतिक आपदाओं की मार: पूर्व में आए भीषण भूकंप के झटकों और हर साल आने वाले तेज आंधी-तूफान के कारण इस जर्जर शेड की छत के कई बड़े-बड़े हिस्से (प्लास्टर) टूटकर नीचे गिर चुके हैं. कई बार दुकानदार और ग्राहक इसके मलबे की चपेट में आने से बाल-बाल बचे हैं.
- टपकती छत की आफत: शेड की छत में जगह-जगह चौड़े छेद और दरारें हो चुकी हैं. स्थिति यह है कि हल्की बारिश में भी पूरी छत छलनी की तरह टपकने लगती है. खुद को और अपनी कीमती व्यावसायिक सामग्रियों (सब्जी, फल, किराना सामान) को भीगने व सड़ने से बचाने के लिए दुकानदार धूप और बरसात के दिनों में ऊपर तिरपाल व प्लास्टिक बांधकर दुकानदारी करने को विवश हैं.
15 वर्षों की गुहार और 4 साल से केवल मिल रहा कोरा आश्वासन
जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा: गुदरी बाजार के पीड़ित व्यवसायियों ने दर्द बयां करते हुए कहा कि वे पिछले डेढ़ दशक (15 वर्षों) से इस मुख्य मार्केटिंग शेड के कायाकल्प और जीर्णोद्धार को लेकर क्षेत्र के स्थानीय सांसदों, विधायकों और जिला स्तरीय अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन चुनाव बीतने के बाद आज तक किसी भी जनप्रतिनिधि ने इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की.
जनप्रतिनिधियों की इस उपेक्षा के बाद, जब पौआखाली नगर पंचायत का गठन हुआ तो व्यापारियों को एक नई उम्मीद जगी थी. परंतु, पिछले चार वर्षों से नगर पंचायत प्रशासन के आला अधिकारियों द्वारा भी हर बार सिर्फ फाइल आगे बढ़ने और जल्द बजट पास होने का ‘कोरा आश्वासन’ ही थमाया जा रहा है. नगर प्रशासन की इस टालमटोल वाली नीति ने गरीब दुकानदारों को पूरी तरह से मायूस और निराश कर दिया है.
व्यवसायियों की मुख्य मांगें और उग्र आंदोलन की चेतावनी
बाजार के प्रबुद्ध व्यवसायियों और स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इस जर्जर ढांचे को नहीं हटाया गया, तो यहाँ कभी भी बिहार का एक बड़ा और भयावह हादसा घटित हो सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी नगर निकाय की होगी.
व्यापारियों की प्रमुख मांगें:
- ध्वस्तीकरण: जर्जर हो चुके इस तीन दशक पुराने जानलेवा शेड को बिना समय गंवाए तुरंत जमींदोज (ध्वस्त) किया जाए, ताकि यह किसी के सिर पर न गिरे.
- आधुनिक पक्का शेड: फुटकर दुकानदारों, महिला खरीदारों और ग्रामीण ग्राहकों की सुरक्षा व सुविधा को ध्यान में रखते हुए यहाँ सर्वसुविधायुक्त आधुनिक व पक्के कंक्रीट शेड का निर्माण कराया जाए.
- ड्रेनेज सिस्टम: बाजार क्षेत्र में बरसात के दिनों में होने वाले जलजमाव और कीचड़ से मुक्ति के लिए उचित ड्रेनेज (नाला) और वाटरप्रूफ शेडिंग की पक्की व्यवस्था की जाए.
अब देखना यह है कि कुंभकर्णी नींद में सोया पौआखाली नगर प्रशासन किसी निर्दोष की जान जाने और बड़े हादसे का इंतजार करता है या समय रहते इन गरीब और असहाय फुटकर व्यवसायियों की सुध लेकर धरातल पर निर्माण कार्य शुरू करवाता है.
