सीमांचल के किशनगंज जिले में पुलिस कार्यप्रणाली को आधुनिक, पारदर्शी और तकनीकी रूप से सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. पुलिस सभागार में आयोजित इस प्रशिक्षण सत्र में जिले के विभिन्न थानों के पुलिस पदाधिकारियों, अनुसंधानकर्ताओं और पुलिसकर्मियों ने भाग लिया. कार्यशाला में पुलिस विभाग में प्रयुक्त होने वाले विभिन्न डिजिटल पोर्टल्स और सूचना प्रौद्योगिकी प्लेटफॉर्म्स के प्रभावी संचालन का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया. इसका मुख्य मकसद केस डायरी, अदालती समन और केस से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों के संधारण को पूरी तरह पेपरलेस और त्वरित गति से निष्पादित करना है.
CCTNS और NIC पोर्टल के संचालन की मिली बारीकियां
प्रशिक्षण सत्र के दौरान तकनीकी प्रशिक्षकों ने क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (CCTNS) और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के प्रमुख पोर्टल्स के व्यावहारिक उपयोग की विस्तृत जानकारी दी. पुलिस कर्मियों को सिखाया गया कि कैसे दैनिक मामलों की प्रविष्टि, प्राथमिकी दर्ज करने और केस डायरी को ऑनलाइन समयबद्ध तरीके से अपलोड किया जाए.
डिजिटल साक्ष्य संधारण और ई-समन पर विशेष जोर
कार्यशाला में आधुनिक अपराधों की जांच के लिहाज से इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल साक्ष्यों के संकलन और सुरक्षा पर विशेष रूप से मंथन हुआ. जांच अधिकारियों को डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित तरीके से सहेजने, उनका तकनीकी बैकअप तैयार करने और उन्हें बिना किसी छेड़छाड़ के अदालत व फॉरेंसिक लैब तक सुरक्षित प्रेषित करने के नियम समझाए गए. इसके साथ ही अदालती वारंट और समन की तामीला में तेजी लाने के लिए ई-समन की पूरी प्रक्रिया का व्यावहारिक अभ्यास कराया गया.
अनुसंधान और कानून-व्यवस्था में बढ़ेगी सूचना तकनीक की भूमिका
प्रशिक्षण में वक्ताओं ने रेखांकित किया कि समकालीन दौर में साइबर अपराध और आधुनिक तौर-तरीकों से होने वाले अपराधों के खुलासे में सूचना प्रौद्योगिकी की भूमिका सबसे अहम हो चुकी है. ऐसे में मैदानी स्तर पर तैनात पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों का नवीनतम सॉफ्टवेयर व डिजिटल टूल्स से पूरी तरह दक्ष होना समय की सबसे बड़ी मांग है.
पारदर्शिता के साथ अभिलेखों के रख-रखाव में मिलेगी मदद
इस व्यापक तकनीकी प्रशिक्षण का प्राथमिक उद्देश्य पुलिसिंग को त्वरित, जवाबदेह और पारदर्शी बनाना है. डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के सही और प्रभावी इस्तेमाल से जहां लंबित मामलों के निष्पादन में तेजी आएगी, वहीं थानों के पुराने अभिलेखों और मुकदमों के रिकॉर्ड को भी सुरक्षित एवं व्यवस्थित रखने में बड़ी मदद मिलेगी.
