Kishanganj News: किशनगंज जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) बेलवा में सिविल सर्जन के आदेश के बावजूद प्रशासनिक बदलाव लागू नहीं होने के आरोप ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं. सामाजिक संस्था सीमांचल सेवा फाउंडेशन ने जिलाधिकारी को तीन पृष्ठ का शिकायत पत्र सौंपकर मामले की उच्चस्तरीय और स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पूर्व प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी की प्रतिनियुक्ति समाप्त होने के बावजूद उनका प्रभाव पीएचसी बेलवा में बना हुआ है, जिससे प्रशासनिक और वित्तीय अनियमितताओं की आशंका जताई गई है.
संस्था ने शिकायत में कई गंभीर बिंदुओं का उल्लेख किया है. हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है और उनकी सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी.
20 जुलाई के आदेश का हवाला
सीमांचल सेवा फाउंडेशन के अनुसार सिविल सर्जन-सह-मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी ने 20 जुलाई 2026 को आदेश जारी कर पीएचसी बेलवा के पूर्व प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. आफताब आलम की प्रतिनियुक्ति समाप्त कर दी थी.
शिकायत में कहा गया है कि आदेश के तहत उनकी प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियां, जिनमें डीडीओ पावर भी शामिल है, वापस लेने और नए प्रभारी को विधिवत प्रभार सौंपने का निर्देश दिया गया था.
आदेश के बावजूद प्रभाव बरकरार होने का आरोप
शिकायत पत्र में आरोप लगाया गया है कि आदेश जारी होने के बाद भी डॉ. आफताब आलम का प्रभाव केंद्र पर बना हुआ है.
संस्था का कहना है कि यदि आदेश के बाद भी किसी प्रकार की वित्तीय स्वीकृति, भुगतान, निकासी या सरकारी अभिलेखों का संचालन पूर्व प्रभारी के प्रभाव में हुआ है, तो यह विभागीय आदेशों और सरकारी वित्तीय अनुशासन का उल्लंघन माना जा सकता है.
वित्तीय गड़बड़ी और अभिलेखों में छेड़छाड़ की आशंका
सीमांचल सेवा फाउंडेशन ने शिकायत में यह भी कहा है कि पूर्व प्रभारी पर पहले भी भ्रष्टाचार, प्रशासनिक अनियमितता और कर्मचारियों से अवैध उगाही जैसे आरोप लगाए जाते रहे हैं.
संस्था का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए सरकारी अभिलेखों में छेड़छाड़ और सरकारी राशि के दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही संभव होगी.
Kishanganj News: डीएम से स्वतंत्र जांच की मांग
संस्था ने जिलाधिकारी से मांग की है कि मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए.
शिकायत में संबंधित वित्तीय एवं प्रशासनिक अभिलेखों को जब्त कर सुरक्षित रखने, बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन की जांच कराने तथा आरोप सही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ विभागीय एवं विधिक कार्रवाई करने की मांग की गई है.
स्वास्थ्य व्यवस्था की पारदर्शिता से जुड़ा मामला
सीमांचल सेवा फाउंडेशन का कहना है कि यह मामला केवल प्रभार हस्तांतरण तक सीमित नहीं है.
उनके अनुसार यह सरकारी आदेशों की गरिमा, वित्तीय पारदर्शिता और आम जनता के स्वास्थ्य अधिकारों से जुड़ा विषय है. इसलिए जिला प्रशासन को मामले में शीघ्र हस्तक्षेप कर तथ्यों की जांच सुनिश्चित करनी चाहिए.
