Paukhali Ward 8 Waterlogging Crisis: पौआखाली से रणविजय की रिपोर्ट: नगर पंचायत पौआखाली के विकास के दावों की हवा निकालनी हो तो वार्ड संख्या आठ का रुख कर लीजिए. यहाँ हनुमान मंदिर के ठीक अपोजिट (सामने) वाली गली में रहने वाले सैकड़ों नागरिकों के लिए ‘विकास’ महज एक किताबी शब्द बनकर रह गया है. बीते चार वर्षों में इस नगर पंचायत में पांच-पांच कार्यपालक पदाधिकारियों (EO) की तैनाती हो चुकी है, लेकिन इस गली की विकराल जलजमाव समस्या का समाधान आज तक नहीं हो सका. नगर प्रशासन की इस बेरुखी ने मोहल्लेवासियों का जीना मुहाल कर दिया है, लेकिन अफसोस कि प्रशासन को जनता की इस पीड़ा को महसूस करने की फुर्सत तक नहीं है.
घरों में घुसता है गंदा पानी, हर साल होता है भारी आर्थिक नुकसान
जल निकासी (ड्रेनेज सिस्टम) की कोई स्थाई व्यवस्था न होने के कारण मानसून की पहली बारिश होते ही स्थिति अत्यंत भयावह हो जाती है. स्थानीय निवासी मनोज कुमार साह और पंकज कुमार सिंह ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि बारिश का गंदा और बदबूदार पानी बहने के बजाय सीधे लोगों के घरों के अंदर तक प्रवेश कर जाता है. इससे न केवल घरों का कीमती सामान, अनाज और फर्नीचर बर्बाद होता है, बल्कि स्थानीय मध्यमवर्गीय परिवारों को भारी आर्थिक चोट भी झेलनी पड़ती है.
घुटने भर गंदे पानी से होकर गुजरने को मजबूर हैं मासूम बच्चे और बुजुर्ग
हालात इस कदर बदतर हो चुके हैं कि नौनिहालों को स्कूल भेजने, रोजमर्रा के राशन-पानी के लिए बाजार जाने या किसी भी मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में बाहर निकलने के लिए लोगों को इसी सड़े हुए पानी से होकर गुजरना पड़ता है. मोहल्ले के आक्रोशित लोगों का कहना है कि ऐसा महसूस होता है मानो इस गंदे पानी में घुटने टेककर चलना ही अब हमारी नियति बन चुकी है. ग्रामीण क्षेत्र से नगर पंचायत का दर्जा मिलने के बावजूद हम आज के दौर में भी आदिम युग जैसी नारकीय जिंदगी जीने को मजबूर हैं.
मोटर पंप के भरोसे ‘जुगाड़’ की जल निकासी, महामारी का बढ़ा खतरा
नगर पंचायत प्रशासन ने अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ते हुए यहाँ एक अस्थाई मोटर पंप तो उपलब्ध करा दिया है, जिसके सहारे पानी खींचकर बाहर फेंका जाता है. लेकिन यह व्यवस्था ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ साबित हो रही है. थोड़ी सी धूप निकलते ही जमा पानी और कीचड़ के सड़ने से ऐसी असहनीय दुर्गंध उठती है कि घरों में सांस लेना तक दूभर हो जाता है. वहीं, बड़े पैमाने पर पनप रहे जहरीले मच्छरों के कारण पूरे वार्ड में मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया जैसी घातक महामारियों का खतरा मंडरा रहा है.
धरातल से कटीं वर्तमान कार्यपालक पदाधिकारी, एसी दफ्तर से नहीं निकलतीं ‘मैडम’
स्थानीय जनता में इस बात को लेकर सबसे ज्यादा आक्रोश है कि वर्तमान कार्यपालक पदाधिकारी ने कार्यभार संभालने के बाद से आज तक इस पीड़ित इलाके का रुख तक नहीं किया है. जनता त्राहि-त्राहि कर रही है, लेकिन मैडम अपने वातानुकूलित (एसी) दफ्तर से बाहर निकलकर जन-समस्या को देखने तक नहीं पहुंची हैं.
प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि जब जिम्मेदार अधिकारी जमीन पर उतरेंगे ही नहीं, तो स्थाई समाधान की योजना कैसे बनेगी? विडंबना देखिए कि अब तक इस गंभीर समस्या के स्थाई निपटारे के लिए नगर पंचायत के पास कोई ब्लू-प्रिंट या मास्टर प्लान तक तैयार नहीं है.
बदहाल सिस्टम से जनता पूछ रही है ये 3 सीधे सवाल:
- जब चार साल में पांच बड़े अफसर बदले जा सकते हैं, तो वार्ड-8 में एक अदद नाले का निर्माण क्यों नहीं हो सकता?
- क्या नगर प्रशासन किसी बड़ी महामारी या मासूम के साथ होने वाले हादसे का इंतजार कर रहा है?
- हर साल नियमों के तहत टैक्स वसूलने वाली नगर पंचायत की जवाबदेही क्या सिर्फ कागजी घोड़े दौड़ाने तक ही सीमित है?
पौआखाली नगर पंचायत का यह अमानवीय रवैया सुशासन के दावों पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है. जरूरत इस बात की है कि वर्तमान कार्यपालक पदाधिकारी बंद कमरों की बंदिशों से बाहर निकलें, इस पीड़ित गली का स्थलीय मुआयना करें और जल निकासी के लिए अविलंब एक स्थाई ड्रेनेज मास्टर प्लान तैयार कर यहां की जनता को इस नारकीय जीवन से मुक्ति दिलाएं.
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