ठाकुरगंज में ₹4.79 लाख का ओपन जिम विवादों में: सार्वजनिक स्थान के बजाय स्कूल परिसर में लगाए उपकरण

किशनगंज के ठाकुरगंज में 'मुख्यमंत्री खेल विकास परियोजना' के तहत बना ओपन जिम विवादों में है. 4.79 लाख रुपये की लागत से बने इस जिम को स्कूल परिसर में स्थापित किया गया है, जिससे आम जनता के सवाल खड़े हो रहे हैं. सवाल यह है कि क्या यह योजना वास्तव में आम नागरिकों के लिए है या सिर्फ एक स्कूल तक सीमित रहेगी.

किशनगंज जिले के ठाकुरगंज में 'मुख्यमंत्री खेल विकास परियोजना' के तहत स्थापित किए गए ओपन जिम को लेकर एक नया प्रशासनिक और सार्वजनिक विवाद खड़ा हो गया है. करीब 4.79 लाख रुपये की सरकारी लागत से आम नागरिकों और युवाओं को फिटनेस से जोड़ने के लिए आए ओपन जिम के उपकरणों को उच्च विद्यालय ठाकुरगंज के बंद परिसर के भीतर स्थापित कर दिया गया है. इस स्थल चयन के बाद अब यह बड़ा सवाल उठने लगा है कि आम जनता के टैक्स के पैसे से बनी यह योजना वास्तव में आम नागरिकों के लिए है या सिर्फ एक स्कूल तक सीमित होकर रह जाएगी.

'प्रखण्ड स्तरीय स्टेडियम' के वैधानिक दर्जे पर उठे गंभीर सवाल

जिम स्थल पर लगाए गए सरकारी सूचना पट्ट (साइनबोर्ड) पर इस परियोजना को "प्रखण्ड स्तरीय स्टेडियम, उच्च विद्यालय ठाकुरगंज" में स्थापित दर्शाया गया है. इसी बिंदु ने विवाद को और हवा दे दी है:

  • आम जनता की पहुंच सीमित: स्थानीय नागरिकों का तर्क है कि उच्च विद्यालय का अपना अलग खेल मैदान है. स्कूल अवधि के दौरान सुरक्षा कारणों से आम लोगों और बाहरी युवाओं का परिसर में प्रवेश स्वाभाविक रूप से वर्जित या सीमित रहता है. ऐसे में सुबह-शाम कसरत करने वाले फिटनेस प्रेमियों को इसका लाभ कैसे मिलेगा?
  • अधिसूचना पर संशय: स्थानीय प्रबुद्ध जनों का कहना है कि अब तक ऐसा कोई सरकारी आदेश, गजट या आधिकारिक अधिसूचना सार्वजनिक नहीं की गई है, जिससे यह साबित हो सके कि ठाकुरगंज उच्च विद्यालय परिसर को विधिवत 'प्रखण्ड स्तरीय स्टेडियम' का वैधानिक दर्जा प्राप्त है. यदि ऐसा कोई आदेश नहीं है, तो सूचना पट्ट पर यह नाम लिखना सीधे तौर पर जांच का विषय है.

मुख्य पार्षद सिकन्दर पटेल ने स्थल चयन पर उठाए सवाल, मांगी रिपोर्ट

इस मामले के तूल पकड़ते ही ठाकुरगंज नगर पंचायत के मुख्य पार्षद सिकन्दर पटेल भी मुखर हो गए हैं. उन्होंने परियोजना के क्रियान्वयन के तौर-तरीकों पर आपत्ति जताते हुए कहा:

"यदि इस ओपन जिम को विद्यालय की बंद बाउंड्री के बजाय नगर के किसी खुले सार्वजनिक मैदान या खेल स्टेडियम में लगाया जाता, तो छात्र-छात्राओं के साथ-साथ नगर के हजारों युवा, खिलाड़ी, महिलाएं और बुजुर्ग भी पूरे दिन इसका लाभ उठा सकते थे. खेल विभाग और जिला प्रशासन को इस परियोजना के स्थल चयन (साइट सिलेक्शन) की पूरी प्रक्रिया को सार्वजनिक करना चाहिए. हम इस संबंध में विभाग से संबंधित सभी सरकारी अभिलेख और स्वीकृत फाइलों की मांग कर रहे हैं." — सिकन्दर पटेल, मुख्य पार्षद, नगर पंचायत ठाकुरगंज

क्या कागजों में हुई हेराफेरी? जिला प्रशासन से जांच की मांग

स्थानीय खेल प्रेमियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री खेल विकास परियोजना का मूल उद्देश्य केवल बजट ठिकाने लगाना या संरचना खड़ी करना नहीं, बल्कि अधिकतम आबादी तक खेल सुविधाएं पहुंचाना है.

अब पूरे नगर की निगाहें जिला प्रशासन, जिलाधिकारी और खेल विभाग के स्पष्टीकरण पर टिकी हैं. लोग यह जानना चाहते हैं कि क्या ओपन जिम की प्रशासनिक स्वीकृति वास्तव में इसी स्कूल के लिए थी या फिर किसी सार्वजनिक पार्क के नाम पर आए फंड को नियमों को ताक पर रखकर यहां खपा दिया गया. यदि विभागीय जांच में सरकारी अभिलेखों के भीतर कोई विसंगति (कागजी हेराफेरी) पाई जाती है, तो यह मामला सार्वजनिक धन के दुरुपयोग और प्रशासनिक पारदर्शिता से जुड़ा एक बड़ा घोटाला साबित हो सकता है.


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लेखक के बारे में

बच्छराज प्रिंट माध्यम में 25 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. ठाकुरगंज (किशनगंज) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक कार्यों, शिक्षा, राजनीति व खेल में रुचि रखते हैं.

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